पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार खत्म हो चुका है। ये दोनों राज्य भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं, जहां पार्टी ने पहले कभी भी अपना प्रभाव नहीं स्थापित किया। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पिछले एक दशक में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रयास किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप वह पिछले विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में उभरी। तमिलनाडु में भाजपा एआईडीएमके की सहयोगी पार्टी रही है, जिससे उसे सत्ता में कुछ अनुभव मिला है, लेकिन पश्चिम बंगाल में उसकी स्थिति जटिल है।

भाजपा का कोरोमंडल ब्लू प्रिंट

भाजपा, जो केंद्र में सत्ता में है, ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक योजना बनाई है। इसे ‘कोरोमंडल ब्लू प्रिंट’ के नाम से जाना जाता है, जिसका उद्देश्य पूर्वी समुद्र तट पर बसे राज्यों और दक्षिण भारत में भाजपा की स्थिति को सुदृढ़ करना है। भाजपा ने ऐसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां उसकी उपस्थिति कमजोर मानी जाती है, जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल।

हालांकि, भाजपा केवल तीन राज्यों में अपनी स्थिति को मजबूत करने में सफल रही है, जिनमें तमिलनाडु और केरल शामिल हैं। दक्षिण भारत के इन राज्यों में भाजपा को एक बाहरी पार्टी के रूप में देखा जाता है, जिसके कारण वह अक्सर सहयोगी के रूप में कार्य करती है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले, भाजपा ने तमिलनाडु में अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास किया था, लेकिन परिणाम अपेक्षित नहीं रहे, जिसके चलते विधानसभा चुनाव में एआईडीएमके के साथ फिर से गठबंधन किया गया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने अपनी स्थिति को मज़बूत करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया है। प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य राज्य में सक्रिय हैं, और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह, जो पिछले दो हफ्तों से राज्य में हैं, भाजपा के सबसे प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आ रहे हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया था, लेकिन बाद में हुए उपचुनावों में उसे लगातार हार का सामना करना पड़ा। अब, भाजपा अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए एक आक्रामक अभियान चला रही है और अमित शाह का दावा है कि पहले चरण में पार्टी 110 से अधिक सीटें जीतने में सफल होगी।

आम आदमी पार्टी के सांसदों का भाजपा में शामिल होना

आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों का भाजपा में शामिल होना पहले से तय था, लेकिन इसे जानबूझकर पश्चिम बंगाल चुनाव के करीब लाया गया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन का 24 अप्रैल को कोलकाता से अचानक दिल्ली उड़ान भरना और यह घोषणा करना, पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक कदम था।

पंजाब में भी भाजपा ने कभी अपने दम पर सरकार बनाने की कोशिश नहीं की है, जहां वह शिरोमणि अकाली दल की सहयोगी पार्टी रही है। किसान बिल के मुद्दे पर आई खटास के बाद दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए। पिछली विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति काफी खराब रही थी। अब, राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे रणनीतिकारों के भाजपा में शामिल होने के बाद, पार्टी पंजाब और गुजरात में अपनी जड़ों को मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।