रांची : झारखंड में ट्रेजरी घोटाले का मामला अब राजधानी रांची तक पहुंच चुका है। इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन (आईएएचपी) के दो कर्मचारियों पर वेतन बिल में हेराफेरी कर 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी करने का आरोप लगा है। यह मामला रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय समिति की जांच के दौरान सामने आया है।
एक गिरफ्तार, दूसरा फरार
पुलिस ने इस मामले में अकाउंटेंट मुनीन्द्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि संजीव कुमार अभी फरार है। कार्यपालक दंडाधिकारी मो. जफर हसनात की शिकायत पर कोतवाली थाना में मामला दर्ज किया गया है।
अपने ही खातों में ट्रांसफर किए करोड़ों
जांच में पता चला है कि मुनीन्द्र कुमार ने अपने एसबीआई और एक्सिस बैंक खातों में कुल 1.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि संजीव कुमार ने अपने खाते में 1.41 करोड़ रुपये भेजे। दोनों ने मिलकर वेतन से अधिक राशि दिखाकर लगभग 2.94 करोड़ रुपये निकाल लिए।
कुबेर पोर्टल की गड़बड़ी से खुला राज
घोटाले का खुलासा कुबेर पोर्टल पर दर्ज वेतन और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर मिलने के बाद हुआ। उच्च स्तरीय समिति ने तीन साल के वेतन बिलों की जांच की, तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई।
तीन साल के बिलों की होगी जांच
वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान हुई इस गड़बड़ी की जांच की जा रही है। डीसी ने तीन साल पुराने बिलों की भी जांच के निर्देश दिए हैं, जिससे और खुलासे होने की संभावना है।
पहले भी हो चुका है बड़ा घोटाला
रांची ट्रेजरी में इससे पहले भी एक बड़ा घोटाला हुआ था, जिसमें पेयजल स्वच्छता विभाग के एक अकाउंटेंट ने करीब 23 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की थी। इस मामले की जांच ईडी कर रही है।
हैरान करने वाले आंकड़े
जांच में यह भी सामने आया कि 37,200 रुपये बेसिक वेतन पाने वाले एक कर्मचारी ने कुछ महीनों में 12 लाख रुपये तक वेतन प्राप्त किया। एक ही बैंक खाते में 39 ट्रांजेक्शन के जरिए 1.82 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए, जिससे सिस्टम में बड़ी खामी का पता चलता है।
कई जिलों में फैला घोटाले का जाल
यह गड़बड़ी केवल रांची तक सीमित नहीं है। हजारीबाग, बोकारो, पलामू, देवघर सहित कई जिलों में फर्जी निकासी के मामले सामने आए हैं। हजारीबाग ट्रेजरी में 29 बैंक खातों के माध्यम से 31.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का मामला उजागर हुआ है।
डीसी का सख्त संदेश
डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस प्रकार के मामलों में शामिल किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

