झारखंड सरकार पर भाजपा प्रवक्ता का हमला
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने झारखंड सरकार पर छात्र आंदोलन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और JPSC विवाद को लेकर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार के खिलाफ बोलने वालों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा मंडरा रहा है।
सरकार पर विरोध की आवाजें दबाने का आरोप
प्रतुल शहदेव ने कहा कि झारखंड सरकार का रवैया नाजी शासन से मिलता-जुलता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हिटलर के शासन में विरोध की आवाजों को दबाया जाता था, उसी तरह झारखंड में भी सरकार प्रदर्शनकारियों को चुप कराने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार अनुमति की शर्तें लगाकर इस अधिकार को सीमित कर रही है।
सोशल मीडिया पर कार्रवाई की धमकी का आरोप
प्रतुल ने आरोप लगाया कि सरकार सोशल मीडिया पर निगरानी रख रही है और सरकार के खिलाफ पोस्ट करने वाले लोगों को नोटिस और कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा और विपक्ष इस प्रकार की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
छात्रों पर मुकदमे का मुद्दा
छात्र आंदोलन को लेकर प्रतुल ने कहा कि लगभग एक हजार छात्रों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और उन पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि छात्रों को कमतर आंकना एक बड़ी गलती होगी। इतिहास इस बात का गवाह है कि छात्र और युवा आंदोलनों ने सत्ता प्रतिष्ठानों को चुनौती दी है।
JPSC विवाद में सरकार की भूमिका पर सवाल
प्रतुल शहदेव ने JPSC विवाद के संबंध में हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सरकार के पास एडवोकेट जनरल और अन्य वरिष्ठ विधि अधिकारियों की टीम होने के बावजूद मामले को हाईकोर्ट में मजबूती से नहीं रखा गया। उनका सवाल था कि जब सरकार और एडवोकेट जनरल के कार्यालय को मामले की एडवांस कॉपी उपलब्ध थी, तो सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल स्वयं उपस्थित क्यों नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक सुनवाई में सरकार की ओर से अपेक्षाकृत जूनियर अधिवक्ता पेश हुए और याचिका की खामियों पर प्रभावी आपत्ति नहीं उठाई गई।
सुप्रीम कोर्ट में JPSC मामले से उम्मीदें
प्रतुल ने 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करने का उल्लेख करते हुए कहा कि जब राज्य सरकार से न्याय की उम्मीद कमजोर हो गई, तब लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जांच की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद बनी है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की।
छात्रों से संवाद का सुझाव
भाजपा प्रवक्ता ने यह सुझाव दिया कि सरकार को छात्र आंदोलन को दबाने के बजाय छात्रों के साथ संवाद करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मुकदमे और कार्रवाई के जरिए युवाओं की आवाज को नहीं दबाया जा सकता और भाजपा छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन में खड़ी रहेगी।


