रांची : झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचलों में इन दिनों एक नया मोड़ आया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के प्रमुख नेता रामेश्वर उरांव के बेटे, रोहित उरांव को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूछताछ के लिए बुलाया गया था। हालाँकि, रोहित ने आज ED के समक्ष उपस्थित होने से इनकार कर दिया है और एजेंसी से तीन हफ्तों का समय मांगा है। उन्होंने कहा है कि वे कुछ दस्तावेज जुटाकर हाजिर होंगे। ED अब उनके आवेदन पर विचार कर फिर से समन जारी करेगी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला झारखंड में हुए कथित शराब घोटाले और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। ED का आरोप है कि राज्य में शराब के सिंडिकेट और सरकारी टेंडरों में व्यापक वित्तीय अनियमितताएँ हुई हैं। इस घोटाले में कई बड़े शराब व्यवसायियों, राजनेताओं और उनके करीबी लोगों के नाम शामिल हैं। जब यह घोटाला हुआ, तब रामेश्वर उरांव झारखंड सरकार में वित्त और खाद्य आपूर्ति मंत्री थे। ED को संदेह है कि अवैध धन का एक बड़ा हिस्सा रोहित उरांव के माध्यम से ठिकाने लगाया गया था या वे इसमें संलिप्त थे।

अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ है?

इस मामले में ED की कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ी है। अगस्त 2023 में, ED ने रामेश्वर उरांव के रांची स्थित आवास, उनके बेटे रोहित उरांव के ठिकानों और शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान, ED को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बड़ी मात्रा में कैश बरामद हुआ। इसके बाद से रोहित ED के रडार पर हैं। ED ने इस मामले में शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए। आज रोहित उरांव को हाजिर होने का समन भेजा गया था, लेकिन उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से तीन हफ्तों का समय मांगा है।

बेटी RSS की करीबी, फिर भी भाई-बाप पर ED की नजर

रामेश्वर उरांव, जो कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं और पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं, की बेटी निशा उरांव सिंहमार के बारे में भी चर्चा होती रहती है। कहा जाता है कि आईआरएस अधिकारी निशा उरांव सिंहमार के संबंध RSS और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ अच्छे रहे हैं। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में कदम रखा। विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि बीजेपी के करीबी लोगों पर केंद्रीय एजेंसियों की नजर नहीं रहती। लेकिन इस मामले ने उन चर्चाओं को बल दिया है कि बेटी के RSS से करीबी संबंध होने के बावजूद ED ने उनके पिता रामेश्वर उरांव और भाई रोहित उरांव को किसी प्रकार की राहत नहीं दी। कानून अपनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है और ED सबूतों के आधार पर रोहित उरांव को घेरने का प्रयास कर रही है।

निशा उरांव का RSS से संबंध अचानक नहीं बना है, बल्कि इसके पीछे उनके द्वारा आयोजित कुछ कार्यक्रम, रैलियां और सार्वजनिक बयान हैं, जो संघ के विचारधारा से मेल खाते हैं। निशा उरांव ने डीलिस्टिंग के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। संघ और उससे जुड़े संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जो आदिवासी धर्मांतरण कर चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर किया जाए। निशा उरांव ने इस मांग का समर्थन करते हुए रांची और अन्य स्थानों पर आयोजित रैलियों में सक्रिय रूप से भाग लिया है।

रांची में विकास भारती के कार्यक्रमों में आती हैं नजर

रांची में विकास भारती के कार्यक्रमों में निशा उरांव की उपस्थिति उनके RSS से संबंध को और मजबूत करती है। विकास भारती एक प्रमुख सामाजिक संगठन है, जिसका नेतृत्व पद्मश्री अशोक भगत कर रहे हैं। अशोक भगत का RSS से गहरा संबंध है और यह संगठन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में संघ की विचारधारा के अनुसार काम करता है। निशा उरांव विकास भारती के मंचों पर आदिवासी कानूनों, पेसा कानून और उनके अधिकारों पर व्याख्यान देती हैं। यहां से वे आदिवासियों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने की अपील करती हैं, जो संघ का मुख्य विचार है।