नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता विक्रांत मैसी अपनी शानदार एक्टिंग और सोच-समझ के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जो चर्चा का विषय बन गया है। विक्रांत और उनकी पत्नी शीतल ठाकुर ने अपने बेटे वरदान के जन्म प्रमाण पत्र पर धर्म से संबंधित कॉलम जानबूझकर खाली छोड़ने का निर्णय लिया। इस निर्णय को लेकर कई लोग उनकी सराहना कर रहे हैं।
विक्रांत मैसी और शीतल ठाकुर के बेटे वरदान का जन्म **7 फरवरी 2024** को हुआ था। जब बच्चे के कानूनी दस्तावेजों की बात आई, तो इस जोड़े ने धर्म से संबंधित कॉलम नहीं भरने का विकल्प चुना। टाइम्स नाउ के साथ एक इंटरव्यू में विक्रांत ने स्पष्ट किया कि यह भारत सरकार की ओर से दिए गए विकल्पों में से एक है और उनका इस पर निर्णय लेना पूर्णतः उनका अधिकार है।
विक्रांत ने कहा कि सरकार ने यह सुविधा प्रदान की है कि आप चाहें तो धर्म का उल्लेख न करने का अधिकार भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब व्यवस्था आपको यह स्वतंत्रता देती है, तो इसका उपयोग करना गलत नहीं है। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि अब सिंगल महिलाओं को पासपोर्ट में पति का नाम दर्ज कराने की आवश्यकता नहीं है।
अभिनेता ने आगे बताया कि वह एक बहु-सांस्कृतिक परिवार से हैं और उन्होंने अपने आस-पास धार्मिक तनाव का नकारात्मक पहलू देखा है। यही अनुभव उनके इस निर्णय की प्रेरणा बनी। विक्रांत ने कहा कि वह अपने बेटे को किसी भी धार्मिक या सामाजिक दबाव से दूर रखना चाहते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वह चाहते हैं कि उनके बेटे को जब बड़ा होने पर यह तय करने का अधिकार मिले कि वह किस पहचान को अपनाना चाहता है। विक्रांत के अनुसार किसी बच्चे पर जन्म के समय से कोई लेबल लगाना उचित नहीं है।
विक्रांत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब समाज में पहचान और धर्म को लेकर बहस चलती रहती है। उनके इस फैसले को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है और सोशल मीडिया पर इसे समझदारी और प्रगतिशीलता के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
अपने कार्य के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण रखने वाले विक्रांत मैसी एक बार फिर यह दर्शाते हैं कि वे न केवल एक अच्छे अभिनेता हैं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक और पिता भी हैं।
