झारखंड में शिक्षा का संकट: 29,995 बच्चे स्कूल से वंचित
झारखंड के शिक्षा विभाग द्वारा जारी ‘डहर’ पोर्टल की नई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 29,995 बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे बाल मजदूरी में लगे हुए हैं, अनाथ हैं, आदिम जनजातियों से संबंधित हैं, घरेलू काम करते हैं, या जिनके माता-पिता काम के लिए अन्य राज्यों में चले जाते हैं। इन बच्चों का अब तक किसी भी स्कूल में नामांकन नहीं हुआ है। इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए, सरकार का शिक्षा विभाग एक विशेष अभियान पर कार्य कर रहा है।
बैक टू स्कूल अभियान
सरकार द्वारा ‘बैक टू स्कूल’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अधिकारी घर-घर जाकर इन बच्चों की जानकारी जुटा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि जब यह सर्वेक्षण पूरा होगा, तो स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकती है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य हर एक छूटे हुए बच्चे को ढूंढकर उनका स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करना है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
प्रवासी बच्चों की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 3,069 प्रवासी बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं और उनका नामांकन भी नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त, 2,129 बाल मजदूर भी शिक्षा से वंचित हैं। 1,897 अनाथ और एकल अभिभावक वाले बच्चे तथा 1,813 आदिम जनजाति के बच्चे भी विद्यालय नहीं जा रहे हैं। इसके अलावा, 1,407 बच्चे घरेलू नौकर के रूप में काम कर रहे हैं और वे भी स्कूली शिक्षा से दूर हैं।
‘डहर’ पोर्टल से बच्चों की पहचान
इन बच्चों की पहचान शिक्षा विभाग के ‘डहर’ पोर्टल के माध्यम से की गई है। इन बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के लिए स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग विशेष योजनाएँ बना रहा है। विभाग पूरे झारखंड में आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान के लिए घर-घर सर्वेक्षण कर रहा है। सर्वेक्षण से पहले स्कूल के पोषक क्षेत्र का मानचित्रण किया जा रहा है और निर्धारित क्षेत्र के साथ शिक्षकों को टैग किया जा रहा है। ‘बैक टू स्कूल’ अभियान के तहत इन बच्चों का स्कूलों में नामांकन सुनिश्चित किया जा रहा है।
