हजारीबाग में आदिवासी संगठनों की सक्रियता
हजारीबाग में आयोजित एक महारैली के आयोजकों, जिनमें बंधु तिर्की भी शामिल हैं, ने 2002-2008 के परिसीमन प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अवधि में झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या को 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, आदिवासी समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के विरोध के चलते, परिसीमन अधिनियम, 2002 की धारा 10B के अंतर्गत झारखंड की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को लागू नहीं किया गया था।
आदिवासी संगठनों की राजनीतिक भागीदारी
अब, परिसीमन की प्रक्रिया फिर से प्रस्तावित होने के बीच, आदिवासी संगठनों ने अपनी राजनीतिक भागीदारी और आरक्षित सीटों की सुरक्षा को लेकर अपनी आवाज उठाने का निर्णय लिया है। उनका मत है कि विकास के नाम पर आदिवासी समाज को राजनीतिक रूप से कमजोर करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे पर आदिवासी समुदाय की एकजुटता स्पष्ट दिखाई दे रही है, और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।






