बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता भरत कपूर अब हमारे बीच नहीं रहे। 80 वर्ष की आयु में अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, और उनके इस असामयिक निधन ने फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ दी है। इस दुखद समाचार को उनके करीबी दोस्त और अभिनेता अवतार गिल ने साझा किया।

‘एक भाई जैसा था भरत’

भरत कपूर के करीबी दोस्त अवतार गिल ने बताया कि उन्हें भरत के बेटे राहुल ने फोन करके दुखद समाचार दिया। अवतार ने कहा, “मैं भरत जी को पचास वर्षों से जानता हूं। हमने अनेक नाटक किए और फिल्मों में एक साथ काम किया। हमने हाल ही में बात नहीं की थी, लेकिन मेरे लिए यह एक बड़े भाई, मार्गदर्शक और मित्र को खोने जैसा है।” उन्होंने कहा कि यह रिश्ता केवल दोस्ती का नहीं बल्कि परिवार जैसा था। फिल्म और थिएटर की दुनिया के कई लोगों ने भरत कपूर को अंतिम विदाई दी।

खलनायकी की भूमिकाओं से बनाई पहचान

भरत कपूर ने अपने करियर में मुख्य रूप से नकारात्मक भूमिकाओं को निभाया। उनकी आंखों की अदाकारी और संवाद कहने का तरीका दर्शकों को भयभीत कर देता था। उन्होंने ‘बरसात’, ‘आखिरी रास्ता’, ‘नूरी’, ‘राम बलराम’ और ‘इन्कार’ जैसी कई प्रसिद्ध फिल्मों में काम किया। हालांकि वे खलनायक के रूप में जाने जाते थे, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में उनकी बहुत इज्जत थी। उन्होंने अपने काम से खलनायकी को भी एक कला का रूप दिया। उनके निधन के बाद कई कलाकारों ने गहरा दुख व्यक्त किया।

पंचतत्व में विलीन हुए भरत

भरत कपूर का अंतिम संस्कार सोमवार शाम सायन अस्पताल के निकट स्थित श्मशान घाट पर किया गया। उनके परिवार में उनकी पत्नी लोपा और दो बेटे राहुल और सागर हैं। उनकी बेटी कविता का निधन कुछ साल पहले हो गया था, जिसका दुख उन्हें हमेशा रहता था। अवतार गिल के अनुसार, अंतिम संस्कार में उनके पारिवारिक सदस्यों के साथ फिल्म इंडस्ट्री के कई करीबी दोस्त भी शामिल हुए। राकेश बेदी, निर्देशक रमेश तलवार और कई अन्य थिएटर के कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

एक दौर में खलनायकी के पर्याय बन चुके थे भरत

हालांकि आज के युवा दर्शक भरत कपूर को भूल चुके हैं, लेकिन अस्सी और नब्बे के दशक में उनका नाम डर का पर्याय था। उन्होंने अपने पात्रों में इतनी गहराई भरी कि लोग उन्हें सड़क पर देखकर भी डरते थे। हालांकि असल जिंदगी में वे बेहद मिलनसार और सरल इंसान थे। अवतार गिल ने बताया कि वे कभी बड़े स्टार नहीं बन पाए, लेकिन फिल्मों में काम करते रहे। उनकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। यह उनकी कहानी युवा कलाकारों के लिए एक प्रेरणा है कि सच्ची मेहनत ही असली पहचान दिलाती है।