जमशेदपुर: पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस में दही में कीड़े मिलने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। डेयरी कंपनी अमूल ने अपनी आंतरिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि उनकी उत्पादन प्रक्रिया में ऐसी घटना का होना “वैज्ञानिक रूप से असंभव” है।

घटना का विवरण

15 मार्च को ट्रेन संख्या 21896 (पटना-टाटानगर वंदे भारत) में यात्रा कर रहे यात्री रितेश कुमार ने शिकायत की कि उन्हें परोसे गए सीलबंद दही के कप में कीड़े दिखाई दिए। इस घटना का वीडियो वायरल होते ही हड़कंप मच गया। रेलवे ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए सेवा प्रदाता पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और उसका ठेका रद्द कर दिया। इसके अलावा, IRCTC पर भी 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

अमूल का बयान

अमूल ने IRCTC अधिकारियों के साथ बैठक के बाद अपने बचाव में कई वैज्ञानिक तर्क प्रस्तुत किए:

  • सीलबंद दही के कप में ऑक्सीजन की कमी होती है, जिससे कीड़े जीवित नहीं रह सकते।
  • दही का अम्लीय स्वभाव सूक्ष्म जीवों के पनपने के अनुकूल नहीं होता।
  • दही को ठंडे तापमान में रखा जाता है, जबकि कीड़ों को गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है।

कंपनी का कहना है कि उनकी उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित और स्वच्छ है, जिससे संक्रमण की संभावना नहीं होती।

वेंडर की सफाई पर सवाल

अमूल की जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि संबंधित दही का बैच उनके अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क से नहीं भेजा गया था। कंपनी ने वीडियो के विश्लेषण के आधार पर यह संदेह व्यक्त किया है कि कीड़े दही के अंदर नहीं, बल्कि ऑनबोर्ड वेंडर की गंदी सर्विंग ट्रे से आ सकते हैं।

रेलवे का दृष्टिकोण

रेलवे प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन प्रदान करना उनकी प्राथमिकता है। भविष्य में वेंडरों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अमूल की गुणवत्ता पर विश्वास

कंपनी ने यह भी बताया कि उनके सभी उत्पाद ISO प्रमाणित संयंत्रों में कठोर गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों के तहत बनाए जाते हैं। उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा जाता है।