📌 गांडीव लाइव डेस्क:

दो भारतीय मूल के नेता बनेंगे प्रमुख पदों पर

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा एच-1बी वीज़ा नियमों को सख्त करने के बीच, दो प्रमुख अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय मूल के नेताओं को उच्च पदों पर नियुक्त किया है। इस कदम के माध्यम से ये कंपनियां दिखाना चाहती हैं कि वे प्रदर्शन को प्राथमिकता देती हैं और किसी भी बाहरी दबाव के सामने नहीं झुकेंगी।

टी-मोबाइल में श्रीनिवास गोपालन का पद

भारतीय मूल के श्रीनिवास गोपालन 1 नवंबर से टी-मोबाइल के नए सीईओ बनेंगे। कंपनी ने उन्हें प्रमोशन देकर यह दर्शाया है कि वे एच-1बी वीज़ा नियमों का सकारात्मक जवाब दे रही हैं। गोपालन, जो वर्तमान में मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) हैं, अपने अनुभव के बल पर माइक सीवर्ट का स्थान लेंगे।

गोपालन ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में व्यक्त किया कि वह इस भूमिका को निभाने के लिए गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कंपनी की उपलब्धियों की सराहना की और बताया कि टी-मोबाइल ने ग्राहक सेवा में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

गोपालन का अनुभव

गोपालन का करियर बेहद समृद्ध है। उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, वोडाफोन, और डॉयचे टेलीकॉम जैसे संस्थानों में काम किया है, जहां उन्होंने कंपनी की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। टी-मोबाइल में, उन्होंने 5G और AI जैसी प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व किया है।

सीवर्ट ने गोपालन को “तेज-तर्रार और प्रभावशाली” बताया और यह विश्वास जताया कि वह ग्राहक अनुभव को और बेहतर करेंगे।

मोल्सन कूर्स में राहुल गोयल की नियुक्ति

दूसरी तरफ, शिकागो स्थित मोल्सन कूर्स ने राहुल गोयल को 1 अक्टूबर से अपना नया सीईओ नियुक्त किया है। गोयल 24 वर्षों से इस कंपनी से जुड़े हुए हैं और भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अमेरिका में बिजनेस की शिक्षा ली थी।

मोल्सन कूर्स के बोर्ड के अध्यक्ष डेविड कूर्स ने कहा कि गोयल का अनुभव और दृष्टि कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण हैं।

राजनीतिक संदर्भ में इन नियुक्तियों का महत्व

यह नियुक्तियाँ इस सन्दर्भ में महत्वपूर्ण हैं कि अमेरिका में बड़ी कंपनियों में भारतीय मूल के लोगों की नियुक्तियों पर राजनीतिक संवेदनशीलता बनी हुई है। MAGA समर्थक कभी-कभी इन व्यक्तियों को इस तरह से चित्रित करते हैं कि वे अमेरिकी नौकरियों पर खतरा बन रहे हैं।

इस समय, भारतीय मूल के पेशेवरों ने अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों का नेतृत्व किया है, जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और फॉर्च्यून 500 कंपनियाँ, जो इस प्रवृत्ति का संकेत देती हैं।