झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सफलता

झारखंड राज्य में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा किए गए लगातार अभियान का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। नक्सली संगठनों की गतिविधियाँ तेजी से कम हो रही हैं और उनका नेटवर्क निरंतर सिमटता जा रहा है। हाल ही में, मंगलवार को 60 लाख रुपए के इनामी 16 नक्सली पुलिस मुख्यालय में डीजीपी के समक्ष आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं, जिसे राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

मुख्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम 15 लाख रुपए का इनाम पाने वाला रीजनल कमांडर संतोष उर्फ गांधी है। इसके अलावा, 10-10 लाख रुपए के इनामी दो जोनल कमांडर अश्विन और चंदन लोहरा भी आत्मसमर्पण करेंगे। इस समूह में तीन सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और तीन दस्ता कमांडर शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर 60 लाख रुपए का इनाम घोषित है।

नक्सलियों की सक्रियता सीमित

सूत्रों के अनुसार, झारखंड में नक्सलियों की सक्रियता अब मुख्य रूप से पश्चिम सिंहभूम के सारंडा जंगल तक सीमित हो गई है। सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण नक्सलियों की गतिविधियों में कमी आई है। इन पर लगातार दबाव के चलते संगठन में बिखराव और मनोबल में गिरावट देखने को मिल रही है। इससे पहले, 21 मई को 25 नक्सलियों और दो जेजेएमपी उग्रवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया था, जो कोल्हान और पश्चिम सिंहभूम क्षेत्र में सक्रिय थे।

सुरक्षा बलों का ध्यान शीर्ष नक्सली नेताओं पर

वर्तमान में, सारंडा जंगल में सेंट्रल कमेटी के सदस्य और एक-एक करोड़ रुपए के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और असीम मंडल अभी भी सक्रिय हैं। सुरक्षा बलों का मुख्य उद्देश्य इन दोनों शीर्ष नक्सली नेताओं को गिरफ्तार करना या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है। कई बार मुठभेड़ों के दौरान इनकी पकड़ में आने की खबरें आई हैं, लेकिन वे हर बार सफलतापूर्वक बच निकलने में सफल रहे हैं।

नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में प्रगति

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि 16 नक्सलियों का यह सामूहिक आत्मसमर्पण झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक बड़ी उपलब्धि है। सुरक्षा दबाव, प्रभावी रणनीति और विकास कार्यों के कारण आने वाले समय में और अधिक नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।