शहादत दिवस पर राज्यवासियों ने याद किया भगवान बिरसा मुंडा को

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सीएनटी कानून बनने से हमारी जल, जंगल जमीन को सुरक्षा कवच मिला है : लोबिन


रांची। झारखंड बचाओ मोर्चा एवं झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वधान में भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल में श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। झारखंड बचाओ मोर्चा के मुख्य संयोजक विधायक लोबिन हेंब्रम ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष का परिणाम है कि आज सीएनटी कानून बना है और इससे हमारी जल, जंगल, जमीन का सुरक्षा कवच मिला है। आज भगवान बिरसा मुंडा के सपनों को तिलांजलि दे कर जल, जंगल, जमीन की लूट जारी है। पूर्व सरकारों की भाति वर्तमान सरकार भी इस लूट खसोट में शामिल है। बिरसा के बताए रास्ते में चलकर एक उलगुलान की आवश्यकता है, जिसमें आदिवासी मूलवासी जनता अपनी भूमिका अदा करेगी। श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष राजू महतो ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के सपनों का झारखंड बनाने के लिए हम सभी कृत संकल्प है। श्री महतो ने आगे कहा कि अबुआ दिसुम अबुआ राज की परिकल्पना को झारखंड के आदिवासी मूलवासी जनता पुन, संघर्ष करने को तैयार है। कार्यक्रम में सुशांतो मुखर्जी, सुबोध दांगी, विनीता खलखो, एरेन कच्छप, डॉ. मुजफ्फर हुसैन, विजय शंकर नायक, नवीन कश्यप, संजय राणा, गोपाल महतो, प्रवीण सहाय एवं गणेश दास समेत अन्य उपस्थित थे।

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ओरमांझी के सदमा में बिरसा मुंडा के पुण्यतिथि पर दी गयी श्रद्धांजलि

ओरमांझी। ओरमांझी प्रखण्ड क्षेत्र के सुदूरवर्ती क्षेत्र सदमा चौक में शुक्रवार को भगवान बिरसा मुंडा स्मारक समिति के संयोजन से भगवान बिरसा मुंडा का 123 वीं पुण्यतिथि मनायी गई। स्मारक समिति के सदस्यों एवं सदमा व चन्दरा पंचायत के सम्मानित जनप्रतिनिधी बुद्धिजीवी लोगों ने बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किये। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य कमिश्नर मुंडा ने कहा हम सभी को गर्व होना चाहिए कि हम लोग उस महापुरुष का पुण्यतिथि मना रहे हैं जिन्होंने आदिवासी समाज की सभयता संस्कृति की रक्षा के लिए लोगों को संगठित कर अंग्रेजों से लड़ाई कर अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऐसे वीर सपूत को शत शत नमन। वहीं सदमा पंचायत के मुखिया सुनील उरांव ने कहा कि बिरसा मुंडा के द्वारा देश हित में दिए कुबार्नी को लोग सदियों तक नहीं भूल पाएंगे। लोगों को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। मौके पर 22 पड़हा कार्यकारिणी समिति केअध्यक्ष बाबुलाल महली, पूर्व मुखिया हरिलाल मुंडा रमेश चंद्र उरांव, पाहन झिरगा पाहन, खुदन मुंडा, वरुण कुमार वार्ड सदस्य, रामकुमार मुंडा, लक्ष्मण मुंडा, राजकुमार उरांव लोकन्न मुंडा, कलू, रवि बुद्धेश्वर मुंडा, सुलेंद्र महतो प्रेमलाल बेदिया सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के नेताओं ने भगवान बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

रांची। भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर प्रदेश कांग्रेस कमिटी के वरीष्ठ नेता आलोक कुमार दूबे व कांग्रेस नेता संजीत यादव, अभिषेक साहू, फिरोज रिजवी मुन्ना, कुमुद रंजन ने बिरसा चौंक पहुंचकर धरती आबा भगवान बिरसा को दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। आलोक कुमार दूबे ने कहा भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे जिन्होंने झारखण्ड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया, भारतीय जमींदारों और जागीरदार तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में जल रहे आदिवासियों को यातना से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें संगठित किया और जागृत किया। बिरसा मुंडा सही मामले में पराक्रम और सामाजिक जागरण के धरातल पर तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे। ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।
कांग्रेस नेता संजीत यादव एवं फिरोज रिजवी मुन्ना ने कहा भगवान बिरसा मुंडा अपने कार्यों और आंदोलन की वजह से भगवान की तरह पूजे जाते हैं,बिरसा मुंडा ने मुंडा विद्रोह पारंपरिक भू-व्यवस्था के जमींदारी व्यवस्था में बदलने के कारण किया।
कांग्रेस नेता अभिषेक साहू एवं कुमुद रंजन ने कहा कि बिरसा मुंडा एक आदिवासी नेता और लोकनायक थे जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आदिवासी समाज को संगठित किया और पूरे झारखंड में आन्दोलन किया। उन्होंने कहा भगवान बिरसा मुंडा ने जो संघर्ष और आन्दोलन का मार्ग हमें दिखाया था उसी रास्ते पर चलकर हमें युवाओं को आगे लेकर चलना है और बिरसा मुंडा के सपने को हकीकत में साकार करना है।

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पुण्यतिथि: याद किये गए धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा


रामगढ़। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को छत्तरमांडू स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर उपायुक्त रामगढ़ सुश्री माधवी मिश्रा, पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडे, वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, अपर समाहर्ता नेल्सम एयोन बागे एवं अनुमंडल पदाधिकारी मोहम्मद जावेद हुसैन सहित जिला स्तरीय वरीय पदाधिकारियों, अधिकारियों के द्वारा पुष्प एवं श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।

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झारखंडी पहचान की लड़ाई को गति देकर मंजिल तक पहुंचाना ही सच्ची श्रदांजलि होगी: नायक

रांची। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के अबुआ दिसुम अबुआ राज के सपने झारखंड में अधूरे हैं’ हमें भगवान बिरसा मुंडा के देखे गए सपनों को पूरा करने के लिए जल जंगल जमीन और झारखंडी पहचान की लड़ाई को गति देकर मंजिल तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रदांजली होगी। उपरोक्त बातें आज झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने कोकर स्थित भगवान बिरसा के समाधि स्थल पर उनके पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कही। उन्होंने इस अवसर पर कहा की पूर्ववर्ती भाजपा की सरकार हो या वर्तमान हेमंत सोरेन की सरकार सभी ने भगवान बिरसा मुंडा के देखे गए सपनों को पूरा करने की दिशा में जल जंगल जमीन की लड़ाई, अबुआ दिसुम अबुआ राज स्थापना की दिशा में किसी भी सरकारों ने सकारात्मक सृजनात्मक ठोस पहल नहीं किया जिस कारण आज राज्य निर्माण के 23 वर्ष के बाद भी भगवान बिरसा मुंडा के देखे गए सपने कल जहां थे आज भी वहीं पर हाशिए पर पड़े हुए।
श्री नायक ने आगे कहा कि सभी सरकारों ने जल जंगल जमीन लूटने वाले भू-माफियाओं, वन माफियाओं को संरक्षण देने का ही कार्य किया है। आज स्थिति बद से बदतर हो गई है। राज्य निर्माण के बाद झारखंडी समाज अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और उन्हें ऐसा लग रहा है कि झारखंड का गठन जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया गया था जिन सपनों को अमलीजामा पहनाना था वीर शहीदों के सपनों को पूरा करना था आज वह सपने अपने ही राज में बिखरे पड़े हुए। भगवान बिरसा मुंडा के देखे गए सपने जल जंगल जमीन की लड़ाई को अब हमें खुद लड़ाई लड़नी होगी और अबुआ दिसुम अबुआ राज की स्थापना के लिए हमें संघर्ष को गति देना होगा एक और उलगुलान हमें करनी होगी हमें खुद बिरसा मुंडा बनना होगा तब ही भगवान बिरसा मुंडा के देखे गए सभी सपनों को हम पूरा कर पाएंगे अन्यथा झारखंड की स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जाएगी और आने वाले पीढ़ी को एक खोखला राज्य एक लूटा हुआ दिकु राज्य एक मरा हुआ राज्य हम देकर जाने के लिए विवश होंगें , इसलिए साथियों आवश्यकता है की तमाम झारखंडी समाज एकता बंद होकर भगवान बिरसा के देखे गए सपनों को आगे रखकर सभी भेदभाव ऊंच-नीच को भूलाकर हमें उस आंदोलन को आगे बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल करने की आवश्यकता बन पड़ी है अन्यथा झारखंड को कोई माई का लाल नहीं बचा सकता । इस अवसर पर सुनील कुमार, अजय नाग, मंटु राम, दीपक पासवान, मो.परवेज, कुन्दन कुमार सिन्हा, भूषण कच्छप ने भी भगवान बिरसा मुंडा को माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक श्रदांजलि दिया।

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धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं झारखंड मुक्ति मोर्चा के युवा नेता आयुष राज वर्मा ने कहा व्यक्ति अपने कर्मों के द्वारा ही सम्मानित होता है। अपने सुकर्मों के बल पर वह भगवान की तरह ही पूजे भी जाने लगता है। बिरसा मुंडा भी अपने सुकर्मों के द्वारा भगवान की तरह पूजे जाते हैं।

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को वर्तमान झारखंड के उलिहातु गाँव में हुआ था। इनकी माता का नाम कर्मी और पिता का नाम सुगना मुंडा था। उनके माता-पिता फसल-बटाईदार थे। बिरसा मुंडा मुंडा-जनजाति के थे। उन्होंने अपना बचपन चलकद गाँव में बिताया। वे मजबूत कद-काठी के थे।

वे पढ़ाई में बहुत रुचि लेते थे। उन्होंने कुंडी बारटोली से निम्न प्राथमिक परीक्षा पास की। उन्होंने चाईबासा के एक मिशन विद्यालय में भी पढ़ाई की। उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे आजीविका के लिए गौर पेड़ा के स्वामी परिवार में नौकरी करने लगे। इनके मालिक का नाम आनंद पांडे था।

उन दिनों जर्मन और रोमन कैथोलिक का विरोध बढ़ रहा था। बिरसा भी इससे प्रभावित हुए। वे विरोध में शामिल हो गए। अंग्रेज जनजातीय कृषि प्रणाली को सामंती शासन में बदलना चाहते थे। वे आदिवासियों की जमीनों को हथियाना चाहते थे। आदिवासी लोग गरीबी और शक्ति के अभाव के कारण उन्हें नहीं रोक पाए।

बिरसा और कुछ अन्य मुंडा लोगों ने इसके विरुद्ध लड़ने का निर्णय लिया। वे भूमि का वास्तविक अधिकार मुंडा लोगों को दिलवाना चाहते थे। इसने अनेक विद्रोहों को उत्पन्न किया। आदिवासी गरीब और अशिक्षित थे। बिरसा ने उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया। वे अन्याय के विरुद्ध उन्हें खड़ा करना चाहते थे, ताकि उन्हें अपना हक मिल सके।

अंग्रेज शासक बिरसा मुंडा को पसंद नहीं करते थे। वे उनके विद्रोह को रोकना चाहते थे। बिरसा मुंडा देशभक्त थे। वे आजादी की लड़ाई के लिए सक्रिय भाग लिया। प्रारंभ में भी एक सुधारवादी थे, बाद में वे अंग्रेज के खिलाफ बहुत सारे विद्रोह किए और लड़ाई लड़ने लगे, इसलिए 3 फरवरी 1900 उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें राँची के जेल में रखा गया। वहाँ उन्हें घोर यातनाएँ दी गईं। एक निर्विवाद नेता के आदिवासियों को संगठित किया। आंदोलन का निष्ठा पूर्वक दमन किया, इसलिए उनको कई बार गिरफ्तार कर लिया गया किंन्तु घबराये नही, वे आंदोलन करते रहे।

बिरसा ने अंग्रेजों के साथ अदम्य साहस एवं पूर्ण साहस के साथ संघर्ष किया है। आदिवासी जनता के साथ अंग्रेजों के नायक परिवार के विरोध में उन्होंने वित्त सत्ता के खिलाफ सशस्त्र विरोध किया। जेल में उनकी घोर यातनाएँ दी गईं। डायरिया के कारण वहाँ उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु सिर्फ पचीस वर्ष की आयु में ही हो गई।

बिरसा का जीवन दूसरों के लिए उदाहरण था। उनके त्याग के सम्मान में भारतीय संसद के केंद्रीय सभा-भवन में उनका चित्र लगाया गया है। बिरसा मुंडा हवाई अड्डा, बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारागार, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय आदि कुछ संस्थान उनके नाम पर हैं। बिरसा की बहादुरी और देशभक्ति कभी भी भूलाई नहीं जाएगी। आज भी वे प्रत्येक भारतवासी के दिल में रहते हैं।

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