कोलकाता में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोड्डा के एक युवा मिक्स मार्शल आर्ट्स (MMA) फाइटर ने सभी को चौंका दिया। देवगन मरांडी ने नेपाल के एक अनुभवी फाइटर को कुछ ही सेकंड में नॉकआउट कर दिया, जिससे खेल जगत में हलचल मच गई। इस धमाकेदार जीत के बाद से देवगन की चर्चा हर जगह हो रही है, और वह अब सोशल मीडिया पर भी सुर्खियों में हैं।
झारखंड के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने वाले देवगन की कहानी प्रेरणादायक है। उनकी हालिया उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी भी किसी बाधा का काम नहीं करती।
टीवी देख फाइटर बनने की ख्वाहिश
देवगन मरांडी गोड्डा जिले के नीमा कला गांव के निवासी हैं। उनका परिवार साधारण आदिवासी पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता सांझला मरांडी ईसीएल (ECL) ललमटिया से रिटायर हुए हैं। देवगन अपने परिवार में चौथे नंबर पर हैं और उनकी प्रारंभिक शिक्षा महागामा के बेथल मिशन स्कूल से हुई। बाद में, उन्होंने भागलपुर में इंटर की पढ़ाई की।
दिलचस्प बात यह है कि देवगन का बचपन से फाइटिंग या मार्शल आर्ट्स से कोई संबंध नहीं था। भागलपुर में पढ़ाई के दौरान उनके रूममेट अनुराग, जो कि केरल के निवासी हैं, UFC देखने के शौकीन थे। इस दौरान देवगन को भी फाइटर बनने की प्रेरणा मिली और उन्होंने अमेरिकी फाइटर ‘जॉन जोंस’ को अपना आदर्श मान लिया।
हालांकि, MMA की ट्रेनिंग महंगी होती है और इसके लिए विशेष डाइट एवं सप्लीमेंट्स की आवश्यकता होती है, जो एक सामान्य परिवार के लिए मुश्किल था। लेकिन देवगन के पिता ने उनके सपने का समर्थन किया और अपनी पेंशन से उनका खर्च उठाया। इसके बाद देवगन दिल्ली गए और वहां ‘हाउस ऑफ ग्लैडिएटर्स’ एकेडमी में लगभग तीन साल तक कड़ी मेहनत की। उनकी फुर्ती और आक्रामकता के कारण ही उन्हें ‘द ग्लैडिएटर बीस्ट’ का नाम मिला।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराने का सपना
कोलकाता में मिली इस महत्वपूर्ण जीत ने देवगन का आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि झारखंड के ग्रामीण युवाओं में अद्भुत प्रतिभा है, बस उन्हें उचित प्लेटफॉर्म और समर्थन की जरूरत है। हालांकि, आगे का सफर चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने रहने के लिए वित्तीय सहायता और स्पॉन्सरशिप की आवश्यकता होती है।
देवगन और उनके परिवार को झारखंड सरकार और खेल मंत्रालय से उम्मीदें हैं। देवगन का कहना है कि उनके पिता ने उन्हें अब तक सहारा दिया है, लेकिन अगर उन्हें सरकारी सहायता या कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप मिलती है, तो वह UFC (Ultimate Fighting Championship) में भारत का तिरंगा लहराना चाहते हैं। देवगन की यह उपलब्धि झारखंड के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, और उन्हें राज्य का असली ‘बाहुबली’ बताया जा रहा है।

