रांची में डिस्ड्रोमीटर की स्थापना: एक नई पहल

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज रांची में अत्याधुनिक डिस्ड्रोमीटर उपकरण की स्थापना की है। यह बिहार-झारखंड क्षेत्र में इस तरह का पहला उन्नत उपकरण है, जो वर्षा की सूक्ष्म भौतिक विशेषताओं का अध्ययन करने और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वर्षा मापन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल का उद्देश्य भारत में आधुनिक वर्षा अवलोकन नेटवर्क का विस्तार करना और वर्षा की सूक्ष्म भौतिक प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझना है।

डिस्ड्रोमीटर के कार्य और महत्व

डिस्ड्रोमीटर एक अत्याधुनिक उपकरण है जो वर्षा की बूंदों के आकार, संख्या और गति का मापन करता है। इसके माध्यम से वर्षा की बूंदों के आकार का वितरण, तीव्रता और संचयी वर्षा जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों का अध्ययन संभव है। यह उपकरण वर्षा की कुल मात्रा के साथ-साथ उसकी सूक्ष्म संरचना और प्रकृति को समझने में मदद करता है। इसकी स्थापना भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के वैज्ञानिक डॉ. अंबुज कुमार झा और रोहित पाटिल द्वारा की गई, जिसमें IMD रांची का सहयोग रहा।

ART परियोजना और मौसम पूर्वानुमान में योगदान

यह डिस्ड्रोमीटर IITM, पुणे की ART परियोजना का हिस्सा है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के “मिशन मौसम” के तहत संचालित हो रही है। इस नेटवर्क का लक्ष्य देश के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में वर्षा की सूक्ष्म संरचना और सूक्ष्मभौतिकीय विशेषताओं का अध्ययन करना है, जिससे मौसम पूर्वानुमान और वर्षा विश्लेषण को और अधिक सटीक बनाया जा सके।

स्थानीय वर्षा प्रणालियों का अध्ययन

रांची और झारखंड क्षेत्र में मानसूनी प्रणालियों और बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न निम्न दबाव प्रणालियों के प्रभाव से व्यापक और कभी-कभी तीव्र वर्षा होती है। गरज-चमक के साथ होने वाली संवहनीय वर्षा भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डिस्ड्रोमीटर के माध्यम से इन विभिन्न वर्षण प्रणालियों के दौरान वर्षा की संरचना में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाएगा।

अनुसंधान में नई दिशा

डॉ. अंबुज कुमार झा ने कहा कि डिस्ड्रोमीटर की स्थापना से रांची और आसपास के क्षेत्र में वर्षा अवलोकन क्षमताएँ मजबूत होंगी और क्षेत्रीय मौसम अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। इन आँकड़ों से रडार आधारित वर्षा आकलन, अवलोकन और मौसम पूर्वानुमान मॉडलों के मूल्यांकन में भी सहायता मिलेगी।