पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की चिंताएँ
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को लेकर वातावरण गरमाया हुआ है। मानिकतला विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के उम्मीदवार तापस रॉय ने चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फलता में हुई गड़बड़ी को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
चुनाव आयोग से मुलाकात
बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल से मुलाकात की। इस बातचीत के दौरान तापस रॉय ने चुनाव आयोग के समक्ष तीन महत्वपूर्ण मुद्दे रखे।
मुख्य मुद्दे
रॉय ने बताया कि पहले मुद्दे का संबंध वर्धमान में हुई घटनाओं से है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब छतों और ऊँची इमारतों से असामाजिक गतिविधियाँ चल रही थीं, तब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और जिला पुलिस क्या कर रही थी।
दूसरा मुद्दा पिंगला और दासपुर क्षेत्रों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से जुड़ा था। रॉय ने कहा कि चुनाव ड्यूटी में अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती नहीं होनी चाहिए और केवल प्रशिक्षित तथा स्थायी बलों को ही तैनात किया जाना चाहिए।
तीसरा मुद्दा वोटों की गिनती के दौरान नियमों के पालन से संबंधित था। उन्होंने कहा कि मतगणना हॉल में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए बैठने की व्यवस्था चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। रॉय ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO), एआरओ (ARO) और ऑब्जर्वर से अनुरोध किया कि नियमों में कोई ढिलाई न हो।
फलता मामले पर नाराजगी
फलता में हुई घटनाओं पर तापस रॉय ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फलता में जो हुआ, वह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट देने में बाधा उत्पन्न की गई और हिन्दू गांव के लोग विरोध कर रहे थे।
TMC की स्थिति पर बीजेपी की टिप्पणी
पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी फलता को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) पिछले 10 वर्षों से मतदाताओं को डराकर वोट देने के लिए मजबूर कर रही है। भट्टाचार्य ने दावे के साथ कहा कि TMC सरकार कमजोर हो चुकी है और अब लोगों ने बेखौफ होकर वोट दिया है।
उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसे थे जिन्होंने पहले कभी वोट नहीं दिया, लेकिन अब वे वोट देने के लिए तैयार हैं। भट्टाचार्य ने इस स्थिति को TMC की हार मानने के संकेत के रूप में देखा।
