झारखंड में शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर चिंता बढ़ी
झारखंड में शिक्षा और रोजगार के अवसरों को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हो रही हैं। हाल ही में, क्लस्टर सिस्टम लागू करने के फैसले ने स्थानीय भाषाओं जैसे नागपुरी, खोरठा, कुरूख, और संथाली की पढ़ाई को खतरे में डाल दिया है। इस नीति का असर सीधे तौर पर ग्रामीण, महिला, आदिवासी, दलित, पिछड़े तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुंच पर पड़ेगा, जिससे ड्रॉपआउट दर में वृद्धि होने की संभावना है। इसे सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाली एक छात्र-विरोधी नीति माना जा रहा है। विभिन्न संगठनों ने इस क्लस्टर सिस्टम को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
परीक्षा और भर्ती में अनियमितताएँ
इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष संदीप जायसवाल ने बताया कि झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं में अनियमितताओं के कई मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, NEET और CUET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में भी गंभीर आरोप लगे हैं। हाल ही में JEE Advanced 2026 में डेटा एक्सपोज़र का मामला भी प्रकाश में आया था। ये सभी घटनाएँ छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं और इनका विरोध किया जा रहा है।
सरकारी नौकरियों में कमी और भर्ती प्रक्रिया में रुकावट
आइसा की राज्य अध्यक्ष विभा ने कहा कि केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण सिविल सेवा परीक्षा, रेलवे, और एसएससी में नौकरियों की संख्या में कमी आई है। झारखंड में भी JSSC CGL, JPSC-JET, JSSC JE, LDC, पुलिस भर्ती, और अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रियाएँ ठप पड़ी हैं। सभी कार्य आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर चलाए जा रहे हैं, जिससे स्थायी नियुक्तियों की संभावनाएँ कम हो गई हैं।

