रांची : झारखंड में वन्यजीवों की तस्करी और इससे संबंधित अपराधों पर नियंत्रण लगाने के लिए बुधवार को रांची में वन भवन के विवेकानंद सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, पुलिस, सीबीआई, ईडी, सीआईएसएफ, आरपीएफ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, और इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसे कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य विभिन्न विभागों के सहयोग से एक ऐसी प्रणाली विकसित करना था जो वन्यजीवों की तस्करी और अपराधों को प्रभावी रूप से रोक सके। बैठक की अध्यक्षता झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) संजीव कुमार ने की। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम विभाग की प्राथमिकता है और इसके लिए एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान आवश्यक है।
हर विभाग में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
संजीव कुमार ने बताया कि वन्यजीव अपराधों की प्रभावी रोकथाम के लिए प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मामलों की नियमित समीक्षा, ऑनलाइन केस प्रबंधन, वित्तीय जांच, अभियोजन में सहयोग, और अपराधियों का अद्यतन प्रोफाइल तैयार करने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि जब तक सभी एजेंसियां एक साथ कार्य नहीं करेंगी, तब तक वन्यजीव तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश लगाना संभव नहीं होगा।
हवाई अड्डों, रेलवे और कुरियर सेवाओं पर निगरानी
बैठक में यह भी बताया गया कि वन्यजीवों और उनके अंगों की तस्करी केवल सड़क मार्ग से ही नहीं, बल्कि हवाई अड्डों, रेलवे, डाक सेवाओं और कुरियर सेवाओं के माध्यम से भी होती है। इसलिए, इन सभी माध्यमों पर निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत साझा करने के लिए एक मजबूत तंत्र बनाने की आवश्यकता है।
कानून और जांच प्रक्रियाओं की जानकारी
वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, नई दिल्ली की अतिरिक्त निदेशक आईपीएस रुचिका ऋषि ने वन्यजीव अपराधों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पुलिस, ईडी, सीबीआई, सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी मिलकर काम करना होगा। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, नागरिक सुरक्षा संहिता और साक्ष्य अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और सुझाव दिया कि सभी एजेंसियों के बीच समन्वय की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए।
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रणनीति
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) और मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक राजीव रंजन ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक स्थिति अन्य राज्यों से भिन्न है। इसलिए, वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार करनी होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य का वन्य प्राणी प्रभाग इस दिशा में सक्रिय है और सभी एजेंसियों के सहयोग से काम करेगा।
सोशल मीडिया का प्रभाव
मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एस. आर. नटेश ने झारखंड में वन्यजीव अपराध नियंत्रण की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कई बार लोग सोशल मीडिया या अन्य साइबर माध्यमों से प्रभावित होकर अनजाने में वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले कार्य कर बैठते हैं। इसलिए, कानून लागू करने के साथ-साथ आम जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाना भी आवश्यक है।
बैठक में शामिल रहे वरिष्ठ अधिकारी
बैठक में आरसीसीएफ डॉ. आर. थांगा पांडियान, रविंद्र नाथ मिश्रा, एसपी एसबी अरविंद कुमार सिंह, एसपी सीआईडी पूज्य प्रकाश, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के राहुल मीणा, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो भोपाल के क्षेत्रीय उपनिदेशक पाटिल सुयोग सुभाष राव, डीएफओ रांची श्रीकांत वर्मा, ईडी की उपनिदेशक पूनम ऊषरा, आईएफएस कुमार आशीष, वन प्रमंडल पदाधिकारी अजिंक्य बनाकर, डीएफओ वन्य प्राणी रांची अवनीश चौधरी, स्टेट टैक्स के सहायक आयुक्त संजय प्रसाद, जेबीवीएनएल के पवन कुमार मिश्रा, सीआईएसएफ, आरपीएफ, आईबी, एयरपोर्ट सीआरपीएफ और रेलवे इंटेलिजेंस सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सभी ने वन्यजीव अपराधों को कम करने और तस्करी रोकने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की।
