कभी मेरे द्वार भी आइये सरकार
कमली लगा रही गुहार, अभी मैं जिंदा हूं

अफसरों ने इस वृद्धा को मृत घोषित कर पेंशन रोक दिया, अपने जिंदा
होने का सबूत लेकर पांच साल से काट रही है प्रखंड कार्यालय का चक्कर
रांची/डकरा। झारखंड सरकार कई माह से आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार कार्यक्रम चला रही है। अधिकारियों और मंत्रियों की मानें तो सरकार जनता के दरवाजे पर पहुंचकर उनको सरकारी योजनाओं का लाभ देने के उद्देश्य से यह योजना चला रही है। हर महीने अफसरों और नेताओं की टोली जिला से लेकर गांव तक में बड़े-बड़े टेंट लगाकर जनता के काम को आसान करने का दावा करती फिर रही है। लेकिन जमीनी सच्चाई (ग्राउंड रियलिटी) इसके ठीक विपरीत है। प्रखंडों में आय-आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों को महीना कौन कहें, सालों चक्कर कांटना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला राजधानी के डकरा से सामने आया है। पिछले पांच सालों से एक वृद्धा अपने जिन्दा होने का सबूत लेकर खलारी प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी है, पर सरकार आपके द्वारा वाले अफसरान को स्टेज प्रोग्राम करने से फुर्सत ही नहीं है कि उसकी बात सुन कर उसका पेंशन शुरु कर सकें। बेचारी थक-हार कर अब निराश हो गयी है।

खलारी के भूतनगर का है मामला
खलारी प्रखंड के चुरी पश्चिमी पंचायत के भूतनगर बस्ती की रहने वाली 70 वर्षीय विधवा कमली देवी बताती हैं कि आठ वर्ष पूर्व उसे सरकार द्वारा वृद्धा पेंशन दिया जाता था। इससे उसको दो वक्त का खाना नसीब हो पाता था। इसी बीच प्रखंड कर्मचारियों द्वारा सत्यापन कर डाटा एंट्री के क्रम में बिना जांच पड़ताल किये उसे मृत घोषित कर दिया गया।
दो बार कैंप में भी फरियाद लगायी, पर नहीं चालू हुआ पेंशन
फाइलों में जिंदा महिला को मृत दिखा देने के बाद नियमानुसार उनकी पेंशन भी रूक गयी। जब कमली को पेंशन मिलना बंद हुआ, तो वह पता करने प्रखंड आॅफिस पहुंची तो उसे अपने मृत घोषित कर दिये जाने का पता चला। इसके बाद से वह अपने जिन्दा होने का सबूत लेकर प्रखंड के सभी साहबों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक मिल कर गुहार लगा चुकी है, लेकिन उसका पेंशन अबतक शुरु नहीं हो पाया। पंचायत में दो बार लगे सरकार आपके द्वार कैंप में भी फरियाद लगाई लेकिन अबतक कोई समाधान नहीं हुआ है।

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