शिबू सोरेन का शव मोरहाबादी आवास पहुंचा, अंतिम दर्शन के लिए जुटी भीड़

by Aaditya HridayAaditya Hriday
Published: Updated:
20250804 204318

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर रांची पहुंचा, विदाई देने के लिए उमड़ी भीड़

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक, दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर सोमवार देर शाम विशेष विमान द्वारा दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल से रांची लाया गया। उनके साथ उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, तथा विधायक बहू कल्पना सोरेन भी थे।

समर्थकों की भारी भीड़ ने किया स्वागत 🌟

रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर जैसे ही पार्थिव शरीर पहुंचा, हजारों समर्थकों और आम लोगों का हुजूम एकत्रित हो गया। “शिबू सोरेन अमर रहें” के नारे लगाते हुए लोग नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए जुटे। एयरपोर्ट से पार्थिव शरीर मोरहाबादी स्थित उनके आवास ले जाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए इसे रखा जाएगा।

श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ उमड़ी 🕊️

मोरहाबादी आवास पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अनेक कार्यकर्ता, समर्थक, और गणमान्य व्यक्ति उनकी अंतिम विदाई के लिए उपस्थित हो रहे हैं। झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के सम्मान में 4 से 6 अगस्त तक तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है, इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित रहेंगे।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम श्रद्दांजलि

मंगलवार सुबह पार्थिव शरीर JMM पार्टी कार्यालय ले जाया जाएगा, जहां समर्थक और कार्यकर्ता उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। उसके बाद, पार्थिव शरीर को झारखंड विधानसभा में ले जाकर राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव, रामगढ़ जिले के नेमरा में बड़का नाला के पास होगा।

दिशोम गुरु की विरासत का सम्मान

शिबू सोरेन, जो ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध थे, झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक रहे। उन्होंने आदिवासी समुदाय के अधिकारों और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, और विपक्षी नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने दिल्ली में उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए और हेमंत सोरेन को सांत्वना दी।

झारखंड के लिए यह एक युग का अंत माना जा रहा है। शिबू सोरेन का जीवन आदिवासियों के अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई के प्रति समर्पित रहा, और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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