📌 गांडीव लाइव डेस्क:
रांची में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस पर पेरेंट्स की शिकायत
रांची में प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर वर्ष विद्यार्थियों से ली जाने वाली री-एडमिशन और वार्षिक फीस को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा ने रांची के जिला कमिश्नर को ईमेल भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें सख्त नियमन की मांग की गई है।
जुड़ने वाले शुल्कों की समस्या
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि हर शैक्षणिक सत्र की शुरूआत में विद्यार्थियों से री-एडमिशन फीस, एनुअल चार्ज या री इनरोलमेंट के नाम पर भारी रकम वसूली जा रही है, जबकि छात्र पहले से उसी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। इन छात्रों के एडमिशन स्टेटस में कोई बदलाव नहीं होता, फिर भी उन्हें ये अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ता है। बहुत से मामलों में, ये शुल्क नए छात्रों की फीस के समान होते हैं, जिससे माता-पिता पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
शिक्षा शुल्क में पारदर्शिता की आवश्यकता
अभिभावकों ने जिला प्रशासन से यह मांग की है कि स्कूलों द्वारा वसूली जा रही री-एडमिशन फीस और अन्य मदों में लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क की जांच की जाए। इसके साथ ही, फीस संरचना में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। यदि कोई शिक्षा संस्थान अनावश्यक या अत्यधिक शुल्क वसूलता है, तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
ज्योति शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने पहले ही मनमानी फीस वसूली पर रोक का निर्णय लिया है, लेकिन इसके बावजूद स्कूलों द्वारा शुल्क वसूली की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
यहाँ पर अभिभावकों का कहना है कि वे पहले से ही ट्यूशन फीस, डेवलपमेंट चार्ज और अन्य निर्धारित शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, ऐसे में हर साल एडमिशन या इनरोलमेंट के नाम पर फीस लेना उचित नहीं है।
इस मुद्दे के समाधान के लिए अभिभावक अब सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं, जिससे कि उन्हें और उनके बच्चों को इस प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े।
