तरंगनी लीकर्स का लाइसेंस रद्द, जांच में खुलासा

रांची के निकट ओरमांझी के उकरीद में स्थित मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री द्वारा रद्द कर दिया गया है। यह प्लांट बिहार के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय से जुड़ा हुआ है। उपायुक्त ने उत्पाद अधिनियम के तहत की गई इस कड़ी कार्रवाई में आरोपियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जांच के दौरान पता चला है कि लाइसेंसी परिसर में अवैध तरीके से व्हिस्की का उत्पादन किया जा रहा था और उत्पाद कर की चोरी के इरादे से गैर-पंजीकृत स्टॉक को छिपाया गया था। इस मामले में सुबोध कुमार, देवेंद्र भगत और रविकांत राय को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। हालांकि, सुबोध कुमार को इस मामले में जमानत मिल चुकी है और वह अब जेल से बाहर हैं।

प्राथमिकी और अवैध शराब का मामला

इस मामले की शुरुआत 1 जुलाई को हुई जब उत्पाद दारोगा रूपेश कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि प्लांट में अवैध रूप से ‘सेल फॉर यूपी’ और ‘सेल फॉर दिल्ली’ के नाम पर शराब का उत्पादन किया जा रहा था। मौके पर से ऐसी शराब बरामद भी की गई थी, जो इस आरोप को और मजबूत करती है। प्रशासन की कार्रवाई इस दिशा में आगे बढ़ रही है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

साक्ष्य गायब होने से अभियोजन की चुनौतियाँ

सूत्रों के अनुसार, यह मामला एक साधारण चोरी से कहीं अधिक गंभीर प्रतीत होता है। अदालत में क्लीन चिट दिलाने के लिए एक सुनियोजित साजिश की संभावना जताई जा रही है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि जब्त की गई कंसाइनमेंट इसी प्लांट में अवैध तरीके से तैयार की गई थी। इसके लिए आवश्यक साक्ष्य जैसे कि केमिकल फॉर्मूलेशन, संबंधित बैच और भौतिक स्टॉक गायब हो चुके हैं। इन साक्ष्यों के अभाव में अभियोजन के लिए अपने दावे को साबित करना कठिन हो सकता है। अब इस मामले में प्रशासन और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।