झारखंड में विदेशी डेबिट कार्ड से किए गए अवैध नकद निकासी का मामला

हाल ही में एक जांच में यह खुलासा हुआ है कि अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक से जुड़े विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग भारत के विभिन्न राज्यों में एटीएम से बार-बार नकदी निकालने के लिए किया गया। इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक महत्वपूर्ण विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें बताया गया है कि एटीएम से निकाली गई राशि का उपयोग उन गतिविधियों के लिए किया गया, जो एक ऐसे संगठन से जुड़ी हैं, जो विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है।

जांच में मिली संलिप्तता

जांच के दौरान पता चला है कि विभिन्न भागों में कई व्यक्तियों की संलिप्तता हो सकती है। विशेष रूप से, मीका मार्क नामक व्यक्ति के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए। ये कार्ड बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन द्वारा रोके गए थे, जब वह इन्हें भारत में लाने की कोशिश कर रहा था।

नकद निकासी का पैटर्न

ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर जैसे वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से प्रभावित क्षेत्रों में इन कार्डों का उपयोग करके असामान्य नकद निकासी की गई है। पिछले कुछ वर्षों में लगभग 6.5 करोड़ रुपये की राशि निकाली गई है। यह स्पष्ट है कि इन विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग संगठित तरीके से नकद निकालने के लिए किया जा रहा है, जो एक संगठित नेटवर्क की संलिप्तता को दर्शाता है।

सुरक्षा और वित्तीय स्थिति पर खतरा

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नकदी आधारित समानांतर अर्थव्यवस्था का उदय भारत की सुरक्षा और वित्तीय अखंडता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। इस प्रकार की गतिविधियों से अवैध धन के प्रवाह को बढ़ावा मिल सकता है, जो आगे चलकर अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल होने की संभावना को जन्म देता है। इसके साथ ही, यह भी संभावना है कि इस राशि का उपयोग धर्मांतरण जैसे कार्यों में किया जा रहा हो।