दुमका: झारखंड के दुमका जिले में स्थित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नाम को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने अस्पताल का नाम “गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल” रखने पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने इसे संताल हूल के ऐतिहासिक महत्व और आदिवासी वीरांगनाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। चंपाई सोरेन ने कहा कि फूलो-झानो नाम केवल एक नाम नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदाय की पहचान और उनके संघर्ष का प्रतीक है। ऐसे में इस नाम को हटाना या बदलना समाज की संवेदनाओं को आहत करने जैसा है।
अधिकारियों से संपर्क
पूर्व मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि उन्होंने अस्पताल के निर्माण में जुटी लार्सन एंड टर्बो कंपनी के प्लानिंग मैनेजर और मेडिकल कॉलेज के उप-प्राचार्य से इस मामले पर चर्चा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाम परिवर्तन के खिलाफ लोगों में बढ़ती नाराज़गी को देखते हुए इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। चंपाई सोरेन ने चेतावनी दी कि यदि नाम में परिवर्तन नहीं किया गया तो 30 जून को हूल दिवस के अवसर पर संताल परगना के माझी हाड़ाम और स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों का बड़ा जमावड़ा दुमका में होगा।
“मुर्मू” शब्द जोड़ने की मांग
चंपाई सोरेन ने सुझाव दिया कि अस्पताल के नाम में “मुर्मू” शब्द भी जोड़ा जाए, ताकि फूलो-झानो मुर्मू की ऐतिहासिक पहचान बनी रहे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और वीरांगनाओं के योगदान के बारे में जानने का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने दिग्घी क्षेत्र में प्रस्तावित बस टर्मिनल का नाम चांद-भैरव के नाम पर रखने की भी मांग की। उनका कहना है कि संताल हूल के नायकों और आदिवासी समाज के महान व्यक्तियों को सम्मान देना अत्यंत आवश्यक है। चंपाई सोरेन के इस बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और बढ़ने की संभावना है, और आदिवासी संगठनों तथा स्थानीय लोगों के बीच इस विषय पर चर्चा शुरू हो चुकी है।
