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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
डेस्कः लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने निर्णय लिया है कि वे तब तक सदन में नहीं आएंगे जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे, भले ही उन्हें सदन में आने के लिए मनाने का प्रयास किया जाए। यह यथास्थिति नियमों के विरूद्ध नहीं है, फिर भी उन्होंने इस निर्णय को लिया है।
अविश्वास प्रस्ताव की संभावित चर्चा
बजट सत्र के दूसरे भाग में, 9 मार्च को स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। इसके लिए पचास सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। सूत्रों के अनुसार, ओम बिरला ने मंगलवार को हाउस सेक्रेटरी-जनरल को निर्देश दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच करें और उचित कार्रवाई करें।
कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव
कांग्रेस ने हाल ही में ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस प्रस्तुत किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि उन्होंने रूल 94C के तहत अविश्वास प्रस्ताव दिया है। खबर है कि कुल 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
विपक्षी सांसदों के आरोप
विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्पीकर ने विपक्षी नेताओं को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी। यह आरोप अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र करता है, जिनमें राहुल गांधी को बोलने से रोकना शामिल है।
सांसदों के निलंबन का मामला
सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर किए गए व्यक्तिगत हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने ओम बिरला के उस बयान पर ध्यान दिलाया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने की सलाह दी थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
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