झारखंड के सियासी गलियारे में नई बहस: राजनीति में दुश्मनी स्थायी नहीं होती।

by PragyaPragya
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📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड की राजनीतिक हलचल अब एक नई दिशा में जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा बीजेपी के प्रभावशाली नेता सी.पी. सिंह को पगड़ी पहनाने की तस्वीर ने राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर हुई इस घटना ने सवाल उठाया है—क्या यह केवल एक शिष्टाचार है, या फिर यह किसी महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन का संकेत है?

नई राजनीति का संकेत? 🤔

हेमंत सोरेन द्वारा सी.पी. सिंह को सम्मानित करना विपक्ष के प्रति उनके बदलते रुख का संकेत माना जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि वर्तमान गठबंधन में कुछ मुद्दों पर असहमति है, और ऐसे में पुरानी मित्रता पुनर्जीवित हो सकती है। झारखंड पहले भी जेएमएम और बीजेपी के बीच गठबंधन देख चुका है, जिससे स्थिति को और भी जटिल बना देता है।

असंतोष और विवाद

हाल के दिनों में झारखंड में जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के भीतर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस के दो पूर्व विधायक और नेता अपने ही गठबंधन सरकार के खिलाफ बोलने लगे हैं। कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद ने हेमंत सोरेन सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार की कार्रवाई ने स्थानीय रैयतों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर उनके जनाधार को नुकसान पहुंचाया है।

वे कहते हैं कि इससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा है, जो खासकर हजारीबाग के गोंदलपुरा में अडाणी के कोल ब्लॉक से संबंधित जनसुनवाई के दौरान घटित झड़प से संबंधित है।

संभावित परिवर्तन?

पलामू के कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने भी गठबंधन की वर्तमान स्थिति को लेकर एक तीखा बयान दिया है। उनका कहना है कि अगले 20 से 25 दिनों में हेमंत सोरेन बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं, जिससे नई सरकार का गठन हो सकता है। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

आगामी चुनावों की निगाहें

इन सभी घटनाक्रमों ने झारखंड की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। अब सभी की नजर नगर निकाय चुनावों पर है, जहां स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है। राजनीति में हमेशा बदलाव की संभावना रहती है, और इस बार क्या कुछ नया होगा, देखने लायक होगा।

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