इंदौर में विवादास्पद प्रेस कॉन्फ्रेंस

इंदौर। हाल ही में इंदौर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और बीजेपी विधायक चिंतामन मालवीय के बीच एक विवाद के संबंध में सवाल पूछे जाने पर स्थिति थोड़ी अजीब हो गई। जब मीडिया ने मंत्री सिलावट से रीना बोरासी द्वारा लगाए गए आरोपों पर विधायक चिंतामणि मालवीय द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस के बारे में पूछा, तो मंत्री का उत्तर स्पष्ट नहीं था और इस पर मंच पर मौजूद अन्य नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मंत्री का जवाब और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया

मंत्री सिलावट ने शुरुआत में इसे “कांग्रेस का अंदरूनी मामला” करार दिया। लेकिन उनके इस बयान के तुरंत बाद मंच पर मौजूद बीजेपी नेताओं ने उन्हें याद दिलाया कि चिंतामणि मालवीय बीजेपी के विधायक हैं। इसके बाद मंत्री ने अपने बयान को संभालने की कोशिश की, लेकिन वह स्पष्ट उत्तर देने में असमर्थ दिखे। उन्होंने कहा कि “यदि आरोप लगाए गए हैं तो उनकी जांच होगी और सच सामने आएगा,” लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए विधायक मालवीय के कदम को उचित ठहराया।

आरोपों की पृष्ठभूमि

रीना बोरासी ने विधायक चिंतामणि मालवीय पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें यौन शोषण और संपत्ति कब्जाने के आरोप शामिल हैं। इन गंभीर आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

मानहानि नोटिस की प्रक्रिया

विधायक मालवीय ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए रीना बोरासी को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। इस नोटिस में बोरासी से सात दिनों के भीतर आरोपों से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज पेश करने को कहा गया है, अन्यथा कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री सिलावट के बदलते बयानों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिससे विपक्ष इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रहा है।