शिबू सोरेन: आदिवासी नेताओं में एक महत्वपूर्ण नाम

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को नेमरा गांव में हुआ। स्वतंत्रता के बाद की भारतीय राजनीति में वे संथाल आदिवासियों के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्हें “दिशोम गुरु” के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ संथाली भाषा में ‘महान नेता’ या ‘राष्ट्र का नेता’ है। शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और अध्यक्ष हैं, और उन्होंने झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही, वे झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिता हैं।

आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष

1960 के दशक के अंत तक, शिबू सोरेन ने संथाल परगना और छोटानागपुर क्षेत्र में आदिवासियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना शुरू किया। उन्होंने बंधुआ मजदूरी, महाजनों द्वारा शराब के दुरुपयोग, और आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ संगठित होने का कार्य किया। ये ऐसे मुद्दे थे जिनकी सुरक्षा छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 के तहत प्राप्त थी।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना

शिबू सोरेन ने 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की, जो आदिवासी अधिकारों और झारखंड राज्य के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन बन गया। उनकी नेतृत्व क्षमता और आदिवासियों के प्रति समर्पण ने उन्हें एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया।