नई दिल्ली: क्रिकेट में निरंतरता यानी कंसिस्टेंसी एक खिलाड़ी की सबसे महत्वपूर्ण पहचान मानी जाती है। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में विराट कोहली का नाम इस संदर्भ में सबसे पहले आता है। टी20 और वनडे दोनों फॉर्मेट में उनका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। ऐसी स्थिति में यह अपेक्षित होता है कि आईपीएल में भी कोहली सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज साबित होंगे। लेकिन आंकड़े कुछ भिन्न कहानी बयां करते हैं। इंडियन प्रीमियर लीग में कंसिस्टेंसी के मामले में एक और नाम उनसे आगे निकलता हुआ नजर आता है।

आईपीएल में रन और शतकों की दृष्टि से कोहली का दबदबा अवश्य है, लेकिन औसत के आंकड़ों में वह शीर्ष पर नहीं हैं। यहाँ कंसिस्टेंसी की असली पहचान केएल राहुल के रूप में सामने आती है। 50 या उससे अधिक पारियां खेलने वाले बल्लेबाजों में राहुल का औसत सबसे अधिक है।

राहुल का औसत 45.67 है, जो अन्य बल्लेबाजों से लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। उनके बाद हेनरिक क्लासेन, डेविड वार्नर, शुभमन गिल, जोस बटलर और कोहली का नाम आता है। क्रिकेट जैसे प्रतिस्पर्धात्मक खेल में इतना बड़ा अंतर महत्वपूर्ण होता है।

अलग-अलग भूमिकाओं में सफलता

राहुल ने अपने आईपीएल करियर में 5 विभिन्न टीमों के लिए खेला है और 6 अलग-अलग बल्लेबाजी स्थानों पर बल्लेबाजी की है। फिर भी, उनके प्रदर्शन में स्थिरता कायम रही है। यह दर्शाता है कि वह परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में दक्ष हैं।

स्ट्राइक रेट पर उठते सवाल

राहुल को अक्सर उनकी स्ट्राइक रेट को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। विशेषकर पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते समय, उनकी टीम की बल्लेबाजी कमजोर होने के कारण, उन्हें संभलकर खेलने की आवश्यकता महसूस हुई, जिससे उनकी गति प्रभावित हुई।

नए अंदाज में वापसी

2025 में दिल्ली से जुड़ने के बाद, राहुल ने अपने खेल में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाया है। 18 मैचों में उनका औसत 47.13 और स्ट्राइक रेट 153.69 रहा। अब वह तेजी और स्थिरता दोनों का संतुलन बनाए रखते हुए खेलते नजर आ रहे हैं।