झारखंड हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: शादीशुदा महिला के साथ संबंध रखना अपराध नहीं
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि शादीशुदा महिला के साथ कथित अवैध संबंध रखना अब अपराध नहीं माना जाएगा। यह निर्णय एक कांस्टेबल की बर्खास्तगी के मामले में आया है, जिसे एक शादीशुदा महिला के साथ संबंध रखने के आरोप में नौकरी से हटाया गया था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक पिछले निर्णय का हवाला देते हुए इस बात को स्पष्ट किया कि एडल्ट्री अब आपराधिक गतिविधि नहीं है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कांस्टेबल की बर्खास्तगी का आधार वह आरोप था, जो चार्जशीट का हिस्सा नहीं था, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
चार्जशीट में बर्खास्तगी का आधार नहीं था
सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने देखा कि विभागीय चार्जशीट में केवल शादीशुदा महिला के साथ संबंध रखने और अनुशासनहीनता के आरोप थे। लेकिन कांस्टेबल की अंतिम बर्खास्तगी का आधार एक बलात्कार की एफआईआर बनी, जो चार्जशीट में शामिल नहीं थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवा नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को केवल उन आरोपों के आधार पर दंडित किया जा सकता है जो चार्जशीट में दर्ज हों। इसके अलावा, शिकायतकर्ता के बयानों के अलावा कोई स्वतंत्र या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे कि आरोपों का समर्थन किया जा सके।
हाईकोर्ट ने विभागीय आदेशों को रद्द किया
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस विभाग के अनुशासनात्मक और अपीलीय अधिकारियों ने बिना उचित साक्ष्यों के कांस्टेबल को सेवा से हटाने का कठोर निर्णय लिया, जो अधिकारों के दुरुपयोग के समान है। साथ ही, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का उल्लेख किया, जिसमें एडल्ट्री को आपराधिक गतिविधियों की श्रेणी से बाहर किया गया था। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भरत पाठक की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए सभी संबंधित विभागीय आदेशों को निरस्त कर दिया।

