झारखंड की जल प्रबंधन रणनीति पर सम्मेलन

झारखंड के जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने हाल ही में आयोजित एक सम्मेलन में राज्य की जल प्रबंधन रणनीति और भविष्य की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन में झारखंड ने जल संरक्षण, सिंचाई क्षमता के अधिकतम उपयोग और जल परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप साझा किया।

जल संचयन की आवश्यकता

हफीजुल हसन ने बताया कि राज्य में लगभग 30 प्रतिशत वन क्षेत्र और पहाड़ी इलाके होने के कारण वर्षा जल का प्रभावी संचयन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य में होने वाली लगभग 80 प्रतिशत वर्षा का पानी बहकर चला जाता है, जिसे रोककर संरक्षित करना और इसे वर्षभर उपयोग में लाना सरकार की प्राथमिकता है।

सिंचाई क्षमता का विकास

सिंचाई क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि झारखंड में लगभग 24.25 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की संभावना है, जबकि अब तक केवल लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षमता का ही विकास किया जा सका है। उन्होंने यह भी कहा कि अब केवल नई परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि मौजूदा सिंचाई संरचनाओं के प्रभावी उपयोग पर भी जोर देना चाहिए।

जल परिवहन में सुधार

नहरों में जल परिवहन के दौरान होने वाले रिसाव को कम करने और खेत के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि सिंचाई के लिए आवश्यक जल की अधिकतम मात्रा किसानों तक सही समय पर पहुंचे।