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📌 गांडीव लाइव डेस्क:
जमशेदपुर: बजट 2026-27 में कलाकारों के लिए अनदेखा
सामाजिक सुरक्षा की कमी पर चिंता
झारखंड कलाकार मंच के अध्यक्ष संजीव बनर्जी, जिन्हें टुबई दा के नाम से भी जाना जाता है, ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कलाकारों के लिए कोई महत्वपूर्ण प्रावधान नहीं किए गए हैं। उन्होंने यह बयान देते हुए हाल के केंद्रीय बजट में महत्वपूर्ण योजनाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की। इस बजट का केन्द्र बिन्दु ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ रहा, जो कि रचनात्मक उद्योग से संबंधित है, लेकिन इस बार कलाकारों को अनदेखा किया गया है।
गिग इकोनॉमी में सक्रिय कलाकारों की स्थिति
संजीव ने आगे बताया कि भारत में लाखों कलाकार गिग इकोनॉमी का हिस्सा हैं। लेकिन उन्हें इस बजट में कोई विशेष पेंशन योजना, स्वास्थ्य बीमा, या भविष्य निधि (PF) का लाभ नहीं मिला। ऐसे में, बीमार या बुजुर्ग होने पर उन्हें दान या फंडरेजिंग पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने强调 किया कि सरकार के पास इस समय देश में सक्रिय कलाकारों की संख्या का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। जब तक कलाकारों को पेशेवर श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं मिलेगी, तब तक वे असंगठित क्षेत्र के श्रमिक ही माने जाते रहेंगे।
सामग्री और सुरक्षा की अनदेखी
संजीव बनर्जी ने कहा कि स्वतंत्र कलाकारों, विशेषकर चित्रकारों और मूर्तिकारों, के लिए कला सामग्री पर लगाया गया उच्च GST एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया है। लंबे समय से रंगों, कैनवस, और अन्य उपकरणों पर कर कम करने की मांग की जा रही थी, लेकिन इस बार इसे भी अनसुना कर दिया गया।
पारंपरिक कलाओं की अनदेखी
इस बजट में डिजिटल कंटेंट और AVGC पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जबकि शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य, और रंगमंच जैसी पारंपरिक कलाओं के लिए कोई ठोस बुनियादी ढांचे का प्रावधान नहीं किया गया है। छोटे शहरों के कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने में अभी भी बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा की दिशा में भी कोई घोषणा नहीं की गई है।
संजीव बनर्जी ने कहा कि स्वतंत्र संगीतकारों और लेखकों के लिए यह काफी निराशाजनक है कि इस बजट में उनके अधिकारों की रक्षा की कोई योजना नहीं बनाई गई है।
इसलिए, यह स्पष्ट है कि वर्ष 2026-27 का बजट कलाकारों के लिए कुछ विशेष लाने में असमर्थ रहा है।
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