टाटा स्टील का नया कैपेक्स लक्ष्य: 20,000 करोड़ रुपये का निवेश

टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 20,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस राशि का अधिकांश हिस्सा भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विकास पर खर्च किया जाएगा। कंपनी का उद्देश्य 50 मिलियन टन उत्पादन क्षमता की ओर आगे बढ़ना है, जिसमें HRPGL जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर निवेश शामिल है।

भारत में निवेश का प्राथमिकता

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीवी. नरेंद्रन और मुख्य वित्तीय अधिकारी कौशिक चटर्जी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में टाटा स्टील ने 14,559 करोड़ रुपये का कैपेक्स खर्च किया था। इस बार यह राशि बढ़ाकर लगभग 20,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस निवेश का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में खर्च किया जाएगा, जो कंपनी के घरेलू बाजार में उत्पादन क्षमता वृद्धि और भविष्य की मांग को पूरा करने की रणनीति को दर्शाता है।

प्रमुख परियोजनाओं पर खर्च

टाटा स्टील के अनुसार, इस कैपेक्स का उपयोग कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में किया जाएगा, जिसमें टिनप्लेट और वायर्स व्यापार का विस्तार, तारापुर स्थित HRPGL परियोजना, जमशेदपुर कोक ओवन्स प्रोजेक्ट, माइनिंग कारोबार, सप्लाई चेन को मजबूत करना और नई तकनीकों को अपनाना शामिल है। कंपनी सस्टेनेबिलिटी और कम कार्बन उत्सर्जन वाली स्टील बनाने की तकनीक पर भी लगातार निवेश कर रही है।

लंबी अवधि का लक्ष्य: 50 मिलियन टन क्षमता

टाटा स्टील की वर्तमान कंसोलिडेटेड स्टील मेकिंग क्षमता 36 मिलियन टन प्रति वर्ष से अधिक है, जिसमें भारत, नीदरलैंड और थाईलैंड की उत्पादन क्षमता शामिल है। हालांकि, कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य इसे बढ़ाकर 50 मिलियन टन प्रति वर्ष से अधिक करना है।

भारत में विस्तार की योजना

इस विस्तार का अधिकांश हिस्सा भारत में होगा, जहां कंपनी 12 मिलियन टन से अधिक नई क्षमता जोड़ने की योजना बना रही है। वर्तमान में, भारत में टाटा स्टील की कुल स्टील मेकिंग क्षमता 27.35 मिलियन टन प्रति वर्ष है, जिसे नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बढ़ाकर 40 मिलियन टन प्रति वर्ष तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।