जमशेदपुर में मोहर्रम की तैयारियां शुरू

मोहर्रम का महीना नजदीक आ रहा है, और चांद के दिखाई देने में केवल तीन दिन बचे हैं। जमशेदपुर में इस अवसर की तैयारियां जोरों पर हैं। साकची में हुसैनी मिशन की मजलिसें वेला रोड पर क्वार्टर नंबर तीन एल टू में आयोजित की जाएंगी। यहां तंबू और कनात लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। चांद रात से मजलिसों का सिलसिला शुरू होगा, जो 12 मोहर्रम तक चलेगा। इस दौरान मातमी जुलूस भी निकाले जाएंगे, जो साकची गोलचक्कर तक जाएंगे।

चांद रात के बाद की गतिविधियां

आज जिलहिज्जा की 26 तारीख है, और तीन दिन बाद जिलहिज्जा की 29 तारीख को चांद के दिखने की उम्मीद है। चांद के दिखाई देने के साथ ही शिया समुदाय के लोग मजलिस और मातम का आयोजन शुरू करेंगे। जमशेदपुर में जाकिर नगर और साकची में हुसैनी मिशन की इमामबारगाहों में मजलिसें आयोजित की जाएंगी। हुसैनी मिशन के अध्यक्ष मुनीर हसन ने बताया कि इस वर्ष इमामबारगाह के लिए वेला रोड पर नया क्वार्टर आवंटित किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर स्थिति में है। यहां सहनशीन और अलम सजाए जाएंगे। सात मोहर्रम और नौ मोहर्रम को मातमी जुलूस निकालने की योजना है।

स्थायी इमामबारगाह की कमी

हालांकि, हुसैनी मिशन के पास अभी तक अपनी स्थायी इमामबारगाह नहीं है, जिसके कारण उन्हें हर साल टाटा स्टील से क्वार्टर लेना पड़ता है। ये क्वार्टर अक्सर जर्जर स्थिति में होते हैं, जिससे टेंट लगाने की आवश्यकता होती है। जहां महिलाएं बैठती हैं, वहां की स्थिति और खराब होती है। जमशेदपुर में टाटा स्टील ने विभिन्न समुदायों के लिए मस्जिद और सामुदायिक भवन बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई है, लेकिन साकची, बिष्टुपुर, गोलमुरी और टेल्को में शिया समुदाय के लिए अभी तक कोई मस्जिद या सामुदायिक भवन नहीं बन पाया है। शिया समुदाय की मांग है कि उन्हें साकची में सामुदायिक भवन बनाने के लिए जल्द ही जमीन आवंटित की जाए।

मानगो में 67 दिनों तक चलेगी मजलिसें

मोहर्रम का मातम लगभग 67 दिनों तक चलता है। मजलिस और मातम का सिलसिला चांद रात से शुरू होकर रबीउल अव्वल की आठ तारीख तक जारी रहता है। इस दौरान जमशेदपुर के मानगो स्थित जाकिरनगर इमामबारगाह में 67 दिनों तक मजलिसें आयोजित की जाएंगी। यहां भी चांद रात से मजलिसों का आयोजन प्रारंभ होगा, जिसमें पेश इमाम मौलाना जकी हैदर उपस्थित रहेंगे।