Table of Contents
📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड विधानसभा में हेमलाल मुर्मू ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा करते हुए अपनी सरकार से सवाल खड़े किए। उन्होंने यह जानना चाहा कि जब पुलिस सक्रियता दिखा रही है, तो राज्य में अपराध के मामले क्यों बढ़ रहे हैं।
🔍 जेल से फरारी और साइबर अपराध की चिंताएँ
हेमलाल मुर्मू ने जेल से फरारी, नशीले पदार्थों की खेती और साइबर अपराध के मामलों को उजागर किया। विशेष रूप से, उन्होंने संथाल परगना क्षेत्र में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पूछा कि क्या वहां शिक्षित पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जा रही है और जागरूकता अभियानों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने सरकार से विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग की।
📊 सरकार का رد और विपक्ष का विरोध
इस पर सरकार की तरफ से मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि साइबर अपराध के 95 प्रतिशत मामलों में रिकवरी की गई है तथा अपराधियों की पहचान भी हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को जरूरी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हालांकि, भाजपा विधायक नीरा यादव ने इन दावों का खंडन करते हुए आंकड़ों की सत्यता पर सवाल उठाए।
📈 आंकड़े और असली स्थिति
हेमलाल मुर्मू ने 2024 और 2025 के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2024 में 1498 साइबर अपराध दर्ज हुए थे, जिनमें केवल 919 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन कोई भी दोषी साबित नहीं हुआ। 2025 में 1413 मामले दर्ज हुए, जिसमें 1268 व्यक्ति गिरफ्तार हुए, लेकिन सिर्फ 37 को दोषी ठहराया गया। उन्होंने चिंता जताई कि यदि पुलिस अनुसंधान ठीक से कर रही है, तो आरोपितों को दोषी ठहराने में कमी क्यों है।
❓ हेमलाल का सवाल: न्याय में विफलता क्यों?
हेमलाल मुर्मू ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों से यह प्रदर्शित होता है कि जांच और गिरफ्तारी हो रही हैं, परंतु न्याय व्यवस्था में साक्ष्य और कार्रवाई का प्रभाव क्यों नहीं दिखता? उनका मानना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूती प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा अपराध की वृद्धि जारी रहेगी।
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!