पूर्वी सिंहभूम में गीता की प्रेरणादायक कहानी
बचपन से ही नानी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पूर्वी सिंहभूम की गीता की कहानी न केवल संघर्ष की है, बल्कि यह एक प्रेरणा भी है। गीता को बचपन से ही उनकी नानी कमला गोराई ने अपने संरक्षण में रखा। हालाँकि, यह यात्रा आसान नहीं रही। गीता के नाना के निधन के बाद, परिवार में कोई स्थायी कमाने वाला नहीं था। फिर भी, नानी ने कभी हार नहीं मानी।
उनकी मेहनत और समर्पण ने गीता की पढ़ाई को संभव बनाया। नानी ने शादी और पार्टियों में कारीगरों को बर्तन भाड़े पर देकर जो भी थोड़ी-बहुत आमदनी प्राप्त की, उसी से गीता की शिक्षा का खर्च उठाया। यह गीता के जीवन में नानी की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रेम को दर्शाता है।
