जामताड़ा में प्रसूता की मौत के बाद राजनीतिक उबाल

जामताड़ा सदर अस्पताल में एक प्रसूता की मृत्यु के बाद उत्पन्न स्थिति ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। इस घटना के परिणामस्वरूप भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज प्राथमिकी ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में हुई इस घटना के दौरान उनके कार्यकर्ताओं ने केवल शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग किया। इसके बावजूद, पार्टी के नेताओं का कहना है कि राजनीतिक दुर्भावना के चलते चुनिंदा नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल की पुलिस अधीक्षक से मुलाकात

इस मुद्दे पर 18 जुलाई 2026 को दुमका के पूर्व सांसद एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील सोरेन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर भाजपा जिला अध्यक्ष, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आरोप

ज्ञापन में भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण स्थानीय जनता में भारी आक्रोश था। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया।

भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास

भाजपा नेताओं ने अपने ज्ञापन में यह भी दावा किया कि इस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और विभिन्न समाचार स्रोतों के दृश्य यह दर्शाते हैं कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने न तो तोड़फोड़ की और न ही किसी प्रकार की हिंसक गतिविधियों में भाग लिया। इसके विपरीत, उन्होंने मौके पर मौजूद उग्र भीड़ को शांत करने का प्रयास किया और प्रशासन एवं पुलिस के साथ सहयोग करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजनीतिक पूर्वाग्रह का आरोप

भाजपा नेताओं ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई दलों ने प्रदर्शन किए हैं, लेकिन इस बार केवल भाजपा के कुछ पदाधिकारियों को ही निशाना बनाया गया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन के दौरान दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन के साथ कई वरिष्ठ भाजपा नेता भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने एसपी से अनुरोध किया कि सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की निष्पक्ष और गहन जांच की जाए। इसके साथ ही निर्दोष भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज FIR पर विधिसम्मत पुनर्विचार करने की मांग की गई।