बोकारो/रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने बोकारो में लापता युवती के मामले में सख्त रुख अपनाया है। लगभग 9 महीने से लापता इस युवती के संबंध में दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कंकाल की पहचान पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान प्रार्थी पक्ष के वकील विंसेट रोहित मार्की ने जो कंकाल बरामद हुआ है, उसे युवती का होने से स्पष्ट इनकार किया। उनका कहना था कि कंकाल की स्थिति को देखकर यह 9 महीने पुराना नहीं, बल्कि 2 से 3 साल पुराना प्रतीत होता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर कंकाल मिला है, वह सार्वजनिक क्षेत्र है, इसलिए यह किसी अन्य व्यक्ति का भी हो सकता है।
DNA टेस्ट न होने पर अदालत की नाराजगी
अदालत ने राज्य सरकार से यह पूछा कि क्या कंकाल का DNA परीक्षण कराया गया है और क्या युवती की मां रेखा देवी के सैंपल लिए गए हैं। जब जवाब मिला कि अब तक DNA जांच नहीं की गई है, तो अदालत ने इस पर नाराजगी जताई और जांच में लापरवाही के बारे में सवाल उठाए।
DGP और SIT को तलब किया गया
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने डीजीपी, एफएसएल निदेशक, बोकारो के पुलिस अधीक्षक और पूरी SIT टीम को अगली सुबह 10:30 बजे अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब जांच में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

