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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ कस्बे में रविवार की रात एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष संदीप त्रिपाठी के 17 वर्षीय बेटे आदित्य त्रिपाठी को पुलिस ने चौराहे पर जमकर पीट दिया। बताया जा रहा है कि पिटाई इतनी बर्बर थी कि उसका एक हाथ तक टूट गया। मामला सामने आते ही BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर दिया और देर रात तक जमकर हंगामा हुआ।
हार्न बजाने पर भड़की पुलिस, युवक को सड़क पर पीटा
आदित्य त्रिपाठी अपने एक दोस्त के साथ किसी निमंत्रण से लौट रहा था। मऊ कस्बे के एक चौराहे पर बारात की भीड़ लगी थी, जिससे ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति बन गई। जब उसने रास्ता बनाने के लिए हार्न बजाया, तो पास में तैनात पुलिसकर्मियों को यह नागवार गुज़रा। आरोप है कि पहले पुलिसकर्मियों ने युवक को डांटा और फिर देखते ही देखते हाथापाई शुरू कर दी।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पुलिस वालों ने आदित्य को पकड़कर डंडों और बेल्ट से पीटना शुरू कर दिया। पीटते हुए उसे थाने ले जाया गया, जहां पर भी बुरी तरह से मारा गया। इस हमले में उसका एक हाथ टूट गया।
थाने पर जमा हुई भीड़, BJP नेताओं ने किया विरोध
जैसे ही खबर फैली कि पुलिस ने BJP नेता के बेटे की बेरहमी से पिटाई की है, पूरे कस्बे में गुस्सा फैल गया। बड़ी संख्या में BJP कार्यकर्ता और स्थानीय लोग थाने पर जमा हो गए। पूर्व विधायक आनंद शुक्ला भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
करीब दो घंटे तक हंगामे के बाद SP अरुण कुमार सिंह को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए SI हरीशंकर राम और कांस्टेबल प्रवीण पांडे को लाइन हाजिर कर दिया। मामले की जांच ASP को सौंपी गई है।
पुलिस और BJP नेता दोनों ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप
इस घटना ने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। BJP नेता संदीप त्रिपाठी ने पुलिस पर अपने नाबालिग बेटे के साथ बर्बरता का आरोप लगाया है, वहीं पुलिस ने पलटवार करते हुए BJP नेता और उनके बेटे पर थाने में हंगामा करने और सिपाही को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है।
CCTV फुटेज की जांच की जा रही है, जिसमें पुलिस का दावा है कि BJP नेता ने खुद थाने के अंदर सिपाही को थप्पड़ मारा था। दोनों पक्षों की ओर से तहरीर दी गई है और अब मामला दो FIR के रूप में दर्ज हो चुका है।
सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल, जनता में आक्रोश
यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सिर्फ हार्न बजाना इतना बड़ा अपराध है कि किसी बच्चे की हड्डी तोड़ दी जाए? इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि अगर BJP नेता का बेटा होते हुए ये हाल है, तो आम जनता के साथ क्या सुलूक होता होगा? यह घटना पुलिस के अंदर जवाबदेही और संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है।
जांच जारी, लेकिन भरोसा डगमगाया
फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने जांच का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन परिवार और समर्थकों में नाराज़गी कायम है। लोगों को अब यह डर सता रहा है कि न्याय मिलेगा भी या नहीं। जिस तरह एक नाबालिग पर पुलिस ने इस तरह से हाथ उठाया, वह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए एक कड़ी चेतावनी है।
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क्या पुलिस को इतनी छूट मिलनी चाहिए कि वह बिना वजह आम लोगों पर हाथ उठा दे? क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच हो पाएगी? नीचे कमेंट करके हमें अपनी राय जरूर बताएं।
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