शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप के मैच का बहिष्कार करने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के लिए एक बड़ा सबक बताया।

<h2 style="text-align: justify;"><strong>भारत की मौनता पर चिंता</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान भले ही IMF और विश्व बैंक से ऋण लेकर जुर्माना चुकाएगा, लेकिन उसने **BCCI** के खिलाफ न केवल कड़ा रुख अपनाया है, बल्कि भारत इस मामले में पीछे रहने को मजबूर हो गया है।</p>

<h3 style="text-align: justify;"><strong>बायकॉट का असर</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">चतुर्वेदी ने कहा, 'पाकिस्तान बायकॉट के सभी परिणामों का सामना करने के लिए तैयार है। यह भारत के खेल मंत्री के लिए एक गंभीर संकेत है। जबकि **BCCI** सबसे अमीर खेल निकाय होने के बावजूद, भारत ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।' उनका यह भी कहना था कि समय रहते उचित निर्णय नहीं लेने पर परिणाम भुगतने होंगे।</p>

<h2 style="text-align: justify;"><strong>पाकिस्तान की स्थिति और भारत की गलती</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को अवसर देकर गलती की है। 'हमने उन्हें एक मौका दिया, जिससे उन्होंने हमें नीचा दिखाने का अवसर पाया है। मुझे लगता है कि कठोर कदम उठाना आवश्यक था,' उन्होंने कहा।</p>

<h3 style="text-align: justify;"><strong>पाकिस्तान का निर्णय</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने 15 फरवरी को प्रस्तावित आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ अपने ग्रुप-स्टेज मैच से मना कर दिया। पाकिस्तान के इस निर्णय के कुछ घँटों बाद आईसीसी ने टिप्पणी की कि ऐसी चुनिंदा भागीदारी वैश्विक खेल आयोजनों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। आईसीसी ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सभी हितधारकों के लिए एक स्वीकार्य समाधान निकालेगा।</p>