केंद्र सरकार सरना धर्म कोड लागु करे

रांची | सरना धर्म कोड महारैली के माध्यम से भारत सरकार तथा संबंधित राज्य सरकारों को संदेश पहुँचाया जा रहा है कि सरना धर्म कोड अब राष्ट्रीय आयाम ग्रहण कर चुका है, जो सर्वविदित है इसके साथ आदिवासियों के संवैधानिक वैधानिक एवं प्राकृतिक अधिकारों पर भी अब तक अतिक्रमण होते आया है। संविधान में आदिवासियों के लिए कई प्रावधानों के होते हुए भी अब तक धरातल में लागू नहीं हो पाया है। यह देश तथा राज्यों के आदिवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण विषय है। आजादी के 75वें वर्ष में हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं लेकिन देश के आदिवासियों की चिंता किसी को नहीं है, ऐसा प्रतीत होता है। सरना धर्म कोड महारैली के माध्यम से कुछ ज्वलन्त एवं सवैधानिक मसले/ मांग निम्नलिखित स्वरूप में प्रस्तुत किये जा रहे हैं। देश के झारखण्ड, उड़ीसा, पं० बगाल, छत्तीशगढ़, बिहार तथा अन्य राज्यों सहित नेपाल, भूटान, आदि देश से भारी संख्या में सरना धर्मावलम्बी शामिल हुए।

  1. जनगणना परिपत्र में हिन्दू मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन एवं बौध अधिसूचित है और बाकि अन्य धर्मों के लिए अन्य धर्म कॉलम अधिसूचित है। आदिवासी देश के प्रथम नागरिक / मालिक है। किन्तु अब तक इनका जनगणना प्रपत्र में धार्मिक पहचान नहीं दी गई है। हमारी मांग है कि सरना धर्म को जनगणना प्रपत्र में पृथक कोड आवंटित हो । चूँकि देश के सौ से अधिक जनजाति समुदायों की धार्मिक आस्था “सरना धर्म” है । सन् 2011 की जनगणना में आवंटित अन्य धर्म कॉलम में 79.37 लाख लोगों ने अपना-अपना धर्म दर्ज किया जिसमें देश के 29 राज्यों में 49.57 लाख (62.45 प्रतिशत) लोगों ने “सरना धर्म” दर्ज किया जो जैन धर्म की संख्या 44.51 लाख से अधिक है। अतः कोई वजह नहीं है कि भारत सरकार सरना धर्मावलम्बी समूह को जनगणना परिपत्र में सरना धर्म कोड आवंटित नहीं करें। ज्ञातव्य हो कि झारखण्ड सरकार ने 11 नवम्बर 2020 को झारखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र में सरना धर्म पारित कर अनुशंसा केन्द्र सरकार को पृथक कोड के लिए भेजा है। सरना धर्मावलंबीयों के लिए बेहद खुशी की बात है कि झारखण्ड सरकार के तर्ज पर पश्चिम बंगाल सरकार ने सरना धर्म कोड का प्रस्ताव को 17फरवरी 2023 का विधान सभा से पारित कर के केन्द्र सरकार को भेज दिया है एवं उडीसा एवं छत्तीसगढ़ से भेजने की तैयारी है। अतः केन्द्र सरकार जनगणना परिपत्र मे सरना धर्म कोड आवंटित करे ।

2 केन्द्र सरकार की मुहिम कि कॉमन सिविल कोड देश में लागू हो इसका जनजाति समाज विरोध करता है। चूँकि देश में 700 जनजाति समाज है तथा उसके अलग-अलग सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मकि अवस्था एवं परंपराएँ है। उसकी विविधता विशिष्टता अनुठापन पर व्यापक प्रतिकूल असर पड़ेगा। भारत अपने संवैधानिक स्वरूप में धर्म निरेपेक्ष गणराज्य है वंहा हिन्दु राज्य कल्पना सर्वथा गलत है।

  1. पांचवी अनुसूची, संविधान की धारा 244 के तहत देश के जिन राज्यों में अनुसूचित क्षेत्र है, वहाँ अब तक कारगर ढंग से जनजाति परामर्श दात्री समिति अपने संवैधानिक स्वरूप में कार्य नहीं कर रही है, ये दुर्भाग्यपूर्ण अवस्था है। अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्यों में पेशा कानून भी अक तक कारगर ढंग से स्वायत शासन का रूप नहीं ले पाया है जबकि यह कानून 24 दिसम्बर 1996 को पारित हुआ है। झारखण्ड में TAC एवं पेशा कानून की स्थिति बद से बदत्तर है।
  2. आदिवासियों की सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व्यवस्था की परिसंपत्तियाँ, यथा पहनई, डालीकतारी, महतोई पइनभोरा, कोटवारी, नौकराना, सरना, अखड़ा, जतरा, मस्ना, हड़गडी, देशवली, दरहा आदि को चिन्हित कर सुरक्षित रखें एवं संवर्धन हेतु राज्य सरकार राशि आवंटित करें ।
  3. आदिवासियों की जमीन पर बाहरियों का अवैध कब्जा हो रहा है तथा सादा पट्टा पर अवैध तरीके से खरीदी बिक्री हो रहा है इसे अविलम्ब रोका जाए। जमीन संबंधी रिकार्ड पर ऑनलाइन छेड़छाड़ की गई है, जिसके कारण विवाद बढ़ गया
  4. गभीर हो । आदिवासी महिला, यादि गैर आदिवासी से विवाह करती है तो उस महिला का आदिवासी स्टेटस एवं अधिकार पूरी तरह से समाप्त किया जाए।

  1. झारखण्ड में वन पट्टा कानून की लचर व्यवस्था है। अब तब 25 प्रतिशत लोगों को भी वनाधिकार कानून के तहत पट्टे नहीं मिले है। सभी राज्यों में भी अक्षरशः पालन हो ।
  2. रघुवर दास की सरकार ने गाँव की उपयोग की जमीनों को लैंड बैंक बनाकर अधिग्रहण किया है। इससे जनजाति समाज पर बुरा असर पड़ रहा है, इसलिए लैंड बैंक कानून को वापस लिया जाए।
    9 केन्द्रीय भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में निहित सोशल इम्पैक्ट एशरमेट ( सामाजिक प्रभाव आकलन / SLA) प्रावधान, जिसको रघुवर दास की सरकार संशोधन करायी है। इसे वापस ली जाय। केन्द्रीय कानून को अक्षरणः पालन किया जाय।
  3. मूल आदिवासियों का धर्मान्तरण हिन्दू धर्म एवं ईसाई धर्म में धडल्ले से हो रहा है। इसे रोकने का प्रावधान राज्य सरकार करें ।
  4. कुरमी जाति को अनुसूचित जनजाति में संसूचित करने की मांग अनुचित है। चूँकि मूल आदिवासी ही अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित होने का अधिकारी है। किसी भी तरह से कुरमी जाति ST बनने का हक नहीं रखते है ।
  5. भारतीय संविधान की धारा 275.1A के तहत भारत सरकार आदिम जनजातियों के लिए राज्य सरकार को राशि आवंटित करती है। परन्तु झारखण्ड में दुखद है कि 2021 से लेकर अब तक के वित्तीय वर्ष में जो भी राशि आई है उसका उपयोग नहीं हुआ है। ट्राइबल सब- प्लान (जनजाति उपयोजना) के लिए आवंटित राशियों का विचलन अन्य मंदों में की जाती है, इसे रोकी जाए एवं आदिवासी हित में खर्च की जाए। पूर्ववर्ती सरकारों ने ट्राईबल सब- प्लान के पैसो का दुरूपयोग एवं बन्दर बांट किया है। इस पर जाँच बैठायी जाए।
  6. राज्य में अनुबंध पर हजारों नियुक्तियाँ हुई जिसमें 80 प्रतिशत बाहरी है। सके साथ ST- SC के संवैधानिक अधिकार आरक्षण रोस्टर का खुल्लम-खुला उल्लंघन है। अतः नियमितिकरण रोकी जाए।
  7. राज्य में 2 लाख 44 हजार पद तृतीय एवं चतुर्थ तथा शिक्षक के पद रिक्त है। राज्य सरकार दुरूस्त नियमावली बनाएं और नियुक्ति प्रक्रिया अविलम्ब शुरू करें।
  8. 21 वर्षों में राज्य सरकार ने जितनी बार नियुक्ति की है उसमें ST- SC का वैकलॉग रिक्त उन पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू किया जाए ।
  9. मराँग बूरु ( बड़ा पहाड़ ) पारसनाथ अपनी प्राचीन मान्यताओं के अनुरूप सुरक्षित रहे ।

राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के विभिन्न अनुषंगी सरना सामाजिक संगठन

राजी पाड़हा सरना प्रार्थी सभा (भारत), वर्ल्ड सरना ओर्गेनाइजेशन, इंटरनेशनल संथाल काउंसिल, केन्द्रीय सरना समिति भारत, राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ, वीर बुधु भगत हूही मोर्चा, झारखण्ड

आदिवासी संयुक्त गावो केन्द्रीय सरना संघर्ष समिति युवा जन क्रांति सना (रामगद), आदिवासी) हो महारामा (कोल्हान, चाईबासा), संयुक्त पाडहा महारागा (खुटी) खडिया विकास सरना समिति (राँची) सरना सगोग समिति (खूटी), सरना धर्म सोतो समिति (खूंटी) झारखण्ड प्रदेश आदिवासी सरना पाडहा समाज, अखिल भारतीय क्रांतिकारी आदिवासी महासभा (कोल्हान जमशेदपुर), संस्थाल परगाना सरना महासभा, बेदिया विकास परिषद, माझी परगना एभेन गॉवता (संस्थाल परगना), ट्राइबल ड्रीमम (जामताड़ा), मांझी परगना सरदार महासभा (जामताडा), जिला सरना समिति (जामताड़ा) सरना यूथ क्लब (झारखण्ड) झारखण्ड प्रदेश आदिवासी सरना पाड़हा समाज, बिरसा विकास जनकल्याण समिति (राँची), कुडुख सरना समाज ( जमशेदपुर), उराँव सरना समिति (चाईबासा), आदिवासी केन्द्रीय सरना समिति ( चतरा एवं हजारीबाग), जय जगत समिति चतरा, क्षेत्रीय सरना समिति पिठोरिया / उरगुटू / बुढ़मू / जिहू / कोनकी, काँके सरना समिति, मानकी मुण्डा महासंध (कोल्हान चाईबासा), सरना आदिवासी युवा संघ (बेड़ो), आदिवासी एकता मंच एवं समस्त सहयोगी संगठन |

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