बिहार की राजनीति में लालू परिवार का विवाद

नई दिल्ली: लालू प्रसाद यादव के परिवार के भीतर की मान्यताओं में उथल-पुथल ने बिहार की राजनीति में गरमी पैदा कर दी है। रोहिणी आचार्य के राजनीति से दूरी बनाने और पारिवारिक संबंधों में कटौती के फैसले से राजनीतिक विमर्श में नयी बहस जन्म ले चुकी है। जैसे-जैसे ये मुद्दा गंभीर होता जा रहा है, विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।

भाजपा का तीखा प्रहार

चिराग पासवान की प्रतिक्रिया

एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन रोहिणी भी मेरे परिवार की सदस्य हैं। जब किसी परिवार में तनाव होता है, तो उसका दुःख समझ में आता है। मैं आशा करता हूँ कि यह सब जल्द ही ठीक हो जाएगा।” यह बयान पारिवारिक संबंधों की पेचीदगियों पर रोशनी डालता है।

जेडीयू की टिप्पणी

जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने इस विवाद को पारिवारिक मुद्दा मानते हुए कहा, “यह उनका व्यक्तिगत मामला है। इस पर राजनीतिक टिपण्णी करना उचित नहीं है। इतने बड़े परिवार में ऐसी समस्याएँ होना दुखद है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरजेडी के लिए भी कठिनाई का विषय है।

साधु यादव का पक्ष

राबड़ी देवी के भाई और रोहिणी के चाचा साधु यादव ने स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “रोहिणी परिवार की बड़ी बेटी हैं। यदि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है, तो यह अस्वीकृत किया जाना चाहिए। उन्हें अपने घरेलू सदस्यों पर आपत्ति जताने का पूरा अधिकार है।” इस टिप्पणी ने विवाद का एक नया मोड़ दिया है।

लालू परिवार के मतभेद

रोहिणी आचार्य की नाराजगी और इसके चारों ओर उभरे बयानों ने लालू परिवार के अंदर के मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। राजनीतिक हलकों में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि यह विवाद आरजेडी और उसके नेतृत्व की छवि पर क्या प्रभाव डालेगा।