झारखंड में सीआईडी की कार्रवाई पर उठे सवाल
राज्य के सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह कहा जा रहा है कि उनके नेतृत्व में सीआईडी एक कमजोर और प्रभावहीन एजेंसी में तब्दील हो गई है। मनोज कौशिक का हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से संबंधित एक विवादास्पद अतीत रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है। इस स्थिति ने कई योग्य अधिकारियों की अनदेखी की है, जो बिना कार्य के बैठे हैं।
कमजोर एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर सवाल
आरोप लगाया गया है कि सीआईडी ने जानबूझकर एक कमजोर एफआईआर दर्ज की है, जिसके तहत बिना किसी उचित जांच के ही आरोप लगाए गए हैं। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस एजेंसी का उद्देश्य सत्ताधारी दल के नेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को बचाना है। जेपीएससी के चेयरमैन से चार बार पूछताछ के बावजूद उनकी गिरफ्तारी न होना इस बात का प्रमाण है कि सीआईडी असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश अपराधियों को बचाने का कार्य कर रही है।
सार्वजनिक ध्यान भटकाने की कोशिश
एक पेशेवर जांच एजेंसी की तरह व्यवहार करने के बजाय, सीआईडी ने जानबूझकर जांच के परिणामों को मीडिया में लीक किया है। इसका उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाना और अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव स्थापित करना है। यह स्थिति सीजीएल मामले की तरह है, जहां केवल नेपाल जाने वाले छात्रों को दोषी ठहराने की कोशिश की गई थी। इस प्रकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सीआईडी की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल उठ रहे हैं।



