रांची में भाजपा नेताओं की हिरासत पर विवाद

रांची में JPSC और JSSC परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ मुख्यमंत्री आवास के बाहर किए गए धरना-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, दीपक प्रकाश और अन्य नेताओं की रिहाई को लेकर प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने कड़ा विरोध जताया है। यह घटना लगभग 10 घंटे तक चली, जिसके बाद भी इन नेताओं को रिहा नहीं किया गया।

तानाशाही का आरोप

अमर कुमार बाउरी ने कहा कि भाजपा नेताओं को बिना कारण हिरासत में रखना तानाशाही की मिसाल है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक काला दिन बताया और कहा कि यह पहली बार है जब विधानसभा के सत्र के दौरान विपक्ष के सभी विधायकों को रोका गया है। बाउरी ने यह भी कहा कि यदि भाजपा नेताओं ने कोई अपराध किया है, तो उन्हें जेल भेजा जाए, लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

विधानसभा सत्र की कार्यवाही पर सवाल

प्रदेश महामंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जब विधानसभा का सत्र चल रहा है, तो विपक्षी दल के सभी विधायकों को क्यों हिरासत में रखा गया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील की और कहा कि क्या केवल सत्ता पक्ष के विधायकों के आधार पर विधानसभा की कार्यवाही चल सकती है? बाउरी ने बताया कि विधानसभा की कार्यवाही के लिए दोनों पक्षों के विधायकों की आवश्यकता होती है।

राज्यसभा सांसद की रुकावट

अमर बाउरी ने आगे कहा कि पार्टी के राज्यसभा सांसद को भी सदन की गतिविधियों में भाग लेने से रोका गया। उन्होंने सवाल किया कि जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले नेताओं को हिरासत में रखना क्या हेमंत सरकार का लोकतंत्र है?