मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाते हुए राज्य के प्रत्येक घर तक पाइपलाइन और नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित समय में पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयजल से संबंधित योजनाओं में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जल संकट वाले क्षेत्रों की निरंतर निगरानी की जानी चाहिए ताकि त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
योजनाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग पर जोर
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने विभाग की निर्माणाधीन योजनाओं की समीक्षा करते हुए बड़ी परियोजनाओं के लिए ठेकेदारों का व्हाट्सएप समूह बनाने का सुझाव दिया ताकि प्रतिदिन कार्य प्रगति की जानकारी प्राप्त की जा सके। उन्होंने जल जीवन मिशन के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए बैकअप योजना विकसित करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के साथ-साथ योजनाओं के पूर्ण होने पर समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने जल पुनर्भरण के लिए सोक पिट जैसी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर 2028 तक राज्य के सभी ग्रामीण घरों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
जल गुणवत्ता और स्वच्छता योजनाओं की समीक्षा
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने जल गुणवत्ता संबंधी समस्याओं पर चिंता व्यक्त की और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त गांवों को प्रोत्साहित करने और ऐसे प्रयासों को पुरस्कृत करने की बात कही। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन, हर घर जल, जल गुणवत्ता निगरानी, बहु ग्रामीण एवं एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, नलकूप, स्वच्छ भारत मिशन, व्यक्तिगत शौचालय, ओडीएफ प्लस गांव, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन और गोबरधन योजना सहित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
