डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर ठगी, CID ने रांची से आरोपी को पकड़ा

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एक नज़र में पूरी खबर

  • रांची में CID ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी विवेक नारसरिया को गिरफ्तार किया है, जो 11 मामलों से जुड़ा है।
  • आरोपी ने खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराकर पैसे ट्रांसफर करवाने की चालाकी की।
  • ठगी के लिए फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था, और आरोपी के पास से कई डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं।

रांची में साइबर ठगी का पर्दाफाश, एक आरोपी गिरफ्तार

रांची: साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत CID ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से पैसे निकालने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी का नाम विवेक नारसरिया है, जो रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र का निवासी है। यह कार्रवाई HDFC बैंक द्वारा दर्ज कराए गए मामले के आधार पर की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की कई धाराएं लागू की गई हैं।

11 मामलों से जुड़ा आरोपी

CID की जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी “Manish Furnishing Company” के नाम से खोले गए बैंक खाते के माध्यम से ठगी कर रहा था। यह खाता देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 11 डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ है, जिससे पता चलता है कि आरोपी का नेटवर्क काफी बड़ा था और वह लंबे समय से इस गतिविधि में लिप्त था।

लोगों को फंसाने की चालाकी

ठगी का तरीका बेहद चालाक था। आरोपी स्वयं को पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों से फोन और वीडियो कॉल करता था। पीड़ितों को बताया जाता था कि उनका नाम किसी बड़े अपराध में आया है, जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, और उन्हें डराया जाता था कि उनकी तत्काल डिजिटल अरेस्ट की जा सकती है। इसके बाद पीड़ितों को लगातार कॉल पर रखा जाता था, ताकि वे किसी और से बात न कर सकें और डर के कारण पैसे ट्रांसफर कर दें।

“सेफ अकाउंट” के नाम पर ठगी

आरोपी पीड़ितों को बताता था कि जांच के लिए पैसे एक “सेफ अकाउंट” में जमा करने होंगे। डर के कारण लोग तुरंत पैसे भेज देते थे, लेकिन बाद में उन्हें पता चलता था कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं।

फर्जी खातों का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के लिए फर्जी या किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन्हीं खातों के माध्यम से पैसे को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता था, ताकि आरोपी पकड़ में न आएं।

मोबाइल और सिम की बरामदगी

गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं। पुलिस अब इन सबूतों की जांच कर रही है ताकि पूरे गिरोह का पता लगाया जा सके।

CID की लोगों से अपील

CID ने आम लोगों से निवेदन किया है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसे मामलों में घबराने की आवश्यकता नहीं है। किसी भी हाल में पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर थाना या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

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