झारखंड में कुत्ते के काटने के मामले बढ़ते, नियंत्रण के लिए की जाएगी ठोस व्यवस्था

by PragyaPragya
Jharkhand Dog Bite Cases : झारखंड में बढ़ रहे डॉग बाइट्स के मामले, नियंत्रण के लिए होगी कारगर व्यवस्था

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या

झारखंड में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2025 तक (जनवरी के अंत तक) कुत्तों के काटने के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में 9,539, 2023 में 31,251, 2024 में 43,875 और 2025 के जनवरी तक 5,344 मामले सामने आए हैं। इन बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए आवारा कुत्तों के नियंत्रण और टीकाकरण उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगर विकास विभाग ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण, शेल्टर की क्षमता बढ़ाने, नसबंदी और टीकाकरण अभियान को मजबूत करने से संबंधित प्रस्ताव राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस पर चर्चा का आयोजन गुरुवार को किया जाएगा।

नसबंदी और टीकाकरण के आंकड़े 📊

सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 2024-25 में 29,491 कुत्तों की नसबंदी की गई है। वहीं, 2019 से 2025 के बीच 74,315 कुत्तों का टीकाकरण किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में कुत्तों की आबादी के अनुपात में यह संख्या काफी कम है। ऐसे में प्रस्तावित है कि जिन शहरों में कुत्तों के काटने के मामले अधिक हैं, वहां पहले चरण में बड़े स्तर पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाए जाएं।

आक्रामक और रेबीज संक्रमित कुत्तों की स्थिति

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि कितने आक्रामक या रेबीज संक्रमित कुत्तों की पहचान हुई है और कितनों को डॉग पाउंड या शेल्टर में रखा गया है। अदालत ने कहा है कि आक्रामक कुत्तों के स्थायी रखरखाव के लिए पर्याप्त शेल्टर की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

संसाधनों की कमी 🤔

राज्य में आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए संसाधन भी सीमित हैं। नगर निकायों ने राज्य सरकार से 58 अतिरिक्त डॉग कैचिंग वाहनों की मांग की है। वर्तमान में 17 पशु चिकित्सक, 17 कुत्ता पकड़ने वाले कर्मी और 11 केज्ड कुत्ता पकड़ने वाले वाहन उपलब्ध हैं।

झारखंड में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए एक ठोस रणनीति की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस संकट से निपटा जा सके।

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