अफसरों की लापरवाही से 250 से ज्यादा पुलों का निर्माण लटका

by Aaditya HridayAaditya Hriday
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हाइकोर्ट ने ग्रामीण विकास विशेष प्रक्षेत्र के टेंडर पर लगायी रोक

रांची। झारखंड में अफसरों की मनमानी के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंच नहीं पाती है और लोग मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर नाराजगी प्रकट करते रहते हैं। ताजा मामला ग्रामीण विकास विशेष प्रक्षेत्र के तहत मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना की पुल-पुलियों से जुड़ा है। झारखंड हाइकोर्ट ने संवेदक संघ हजारीबाग की याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्रामीण विकास विशेष प्रक्षेत्र के लगभग 250 से अधिक टेंडरों पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय कुमार मिश्रा और जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए उनसे इस मामले में जवाब मांगा है। हाइकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर निर्धारित की है और तबतक के लिए इन टेंडरों पर स्टे लगा दिया है। क्या है मामला : ग्रामीण विकास विशेष प्रक्षेत्र के मुख्य अभियंता रहे बिरेंद्र राम पर ईडी की कार्रवाई और गिरμतारी के ठीक पहले विभाग ने लगभग 274 पुल-पुलिया के निर्माण के लिए टेंडर निकाला था। बिरेंद्र राम की गिरμतारी के बाद मुख्य अभियंता बने सुरेंद्र कुमार ने सभी टेंडर को तत्काल निरस्त करते हुए नए सीरे से टेंडर जारी किया।

नये टेंडर डॉक्यूमेंट में सुरेंद्र कुमार ने एक बड़ा बदलाव करते हुए पूर्व निर्धारित टर्न ओवर को 60 प्रतिशत की जगह बढ़ा कर 150 प्रतिशत कर दिया। इसका असर यह हुआ कि अधिकतर छोटे ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया की दौर से बाहर हो गये। दर्जनों बीडीओ-सीओ आॅफिस और आवास का काम भी हुआ प्रभावित अफसरों, मंत्रियों से गुहार के बाद हाइकोर्ट पहुंचा मामला मुख्य अभियंता सुरेंद्र कुमार की इस कार्रवाई से परेशान राज्य भर के संवेदकों ने विभागीय अफसरों, मंत्रियों से लेकर सीएम तक आवेदन देकर गुहार लगायी। कहीं से कोई मदद नहीं मिलने पर इस मामले में संवेदक संघ हजारीबाग और झारखंड संवेदक संघ बोकारो ने झारखंड हाइकोर्ट में याचिका दायर की। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जानकारी ले रहा हूं : मुख्य अ•िायंता ग्रामीण विकास विशेष प्रक्षेत्र के मुख्य अ•िायंता सुरेंद्र कुमार ने गांडीव द्वारा पूछे जाने पर कहा कि अभी उनको हाइकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं है। टेंडर प्रक्रिया बाधित होने से विकास प्र•ाावित होने के सवाल पर उन्होंने चुप्पी साध ली |

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