भाजपा का गांवों और महिलाओं के विकास के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं: दृष्टि नाउ

by PragyaPragya
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📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड बजट पर झामुमो का प्रतिक्रिया: भाजपा के आरोपों को बताया निराधार

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू द्वारा राज्य बजट पर उठाए गए सवालों को बेबुनियाद और भ्रामक करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के राजनीतिक संकट के चलते इस जनहितकारी बजट को “दिशाहीन” और “रंगहीन” बताया जा रहा है।

बजट की प्रमुख उपलब्धियों पर की चर्चा 💰

विनोद पांडेय ने इस बजट की मुख्य उपलब्धियों पर बात करते हुए बताया कि महिला सशक्तिकरण के लिए 34,211 करोड़ रुपये का जेंडर बजट निर्धारित किया गया है, जो राज्य में महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। इसके अलावा, बाल कल्याण के लिए 10,793 करोड़ रुपये का प्रावधान, ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए 1,000 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना के तहत 730 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

रोजगार सृजन की योजनाएं 📈

उन्होंने आगे बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के माध्यम से 1.24 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव के साथ लगभग 45 हजार रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा को ये योजनाएं “लूट” इसलिए लग रही हैं क्योंकि बजट सीधे आम जनता, किसानों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त करता है। धान खरीद, छात्रवृत्ति, पेंशन और गैस सिलेंडर जैसे मुद्दों पर भाजपा द्वारा फैलाई जा रही गलतफहमियों का जवाब भी इसी बजट में है, जो सामाजिक सुरक्षा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को मजबूती देता है।

विकास का सही रास्ता 🔍

झामुमो महासचिव ने स्पष्ट किया कि केंद्र से प्राप्त सहायता और राज्य के संसाधनों का संतुलित उपयोग सही विकास के लिए आवश्यक है, और यही इस बजट की मूल भावना है। उन्होंने स्थानीय निकायों को 1,172 करोड़ 66 लाख रुपये का अनुदान देने की सराहना की, जिससे विकेंद्रीकृत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

भाजपा के आरोपों का दिया जवाब ✔️

विनोद पांडेय ने कहा, “भाजपा के पास गांवों के विकास का कोई स्पष्ट विजन नहीं है, और न ही महिलाओं के सशक्तिकरण का कोई ठोस योजना है। इसीलिए वे तथ्यहीन आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट झारखंड को आत्मनिर्भर और समावेशी विकास के नए युग में ले जाएगा, जो “अबुआ दिशोम” की थीम पर आधारित है, जिसमें गांव, गरीब, महिला और युवा को प्राथमिकता दी गई है।


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