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बालीगंज सीट से उम्मीदवार का नाम वापस लिया
कोलकाता में जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बालीगंज सीट से घोषित उम्मीदवार निशा चटर्जी को हटा दिया। कबीर ने कहा कि चटर्जी की सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री पार्टी की छवि से मेल नहीं खाती और इससे जनता में गलत संदेश फैल सकता है।
पार्टी की छवि की सुरक्षा
अपने निर्णय पर स्पष्टता देते हुए, कबीर ने कहा कि उन्होंने चटर्जी की तस्वीरें और वीडियो देखे, जिसके बाद उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने कहा, “यह फैसला लेना मेरे अधिकार में है।” कबीर ने यह भी बताया कि बालीगंज सीट के लिए एक नई महिला उम्मीदवार का नाम जल्द ही घोषित किया जाएगा, जो संभवतः मुस्लिम समुदाय से हो सकती हैं।
धर्म के आधार पर आरोप
वहीं, निशा चटर्जी ने इस फैसले को धर्म से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनका हटना केवल इसलिए हुआ क्योंकि वह हिंदू हैं। चटर्जी ने कहा, “हुमायूं कबीर ने खुद मुझे चुनावी उम्मीदवार बनने के लिए कहा था, लेकिन अब मुझ पर सवाल उठाए जा रहे हैं।”
सामाजिक शर्मिंदगी और कानूनी कार्रवाई की संभावना
चटर्जी ने कबीर की बाबरी मस्जिद योजना के समर्थन में रहें, फिर भी उनके साथ इस तरह का व्यवहार करने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “इस घटना से मुझे सामाजिक तौर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। मैं कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही हूं।”
कबीर का निलंबन और विवाद
हुमायून कबीर, जो भारतपुर से विधायक हैं, को 4 दिसंबर को टीएमसी द्वारा निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने के उनके बयान के कारण हुई, जिसने राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित मस्जिद की आधारशिला रखी थी, जो 1992 में बाबरी मस्जिद के ध्वंस की सालगिरह थी। इस निर्णय ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा की है।
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