Table of Contents
झारखंड हाई कोर्ट में गैंगस्टर अमन साहू की मौत की सीबीआइ जांच पर सुनवाई
रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने गैंगस्टर अमन साहू की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत से संबंधित मामले की सीबीआइ जांच की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की।न्यायालय ने राज्य सरकार से प्रश्न किया कि इस मामले में प्राथमिकी पंजीकृत क्यों नहीं की गई और किस कानून के तहत देरी हो रही है।
अगले सुनवाई का दिन 12 सितंबर निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने बताया कि अमन साहू एक कुख्यात अपराधी था और उसके खिलाफ कई मामले चल रहे थे। इसके साथ ही कहा गया कि शिकायत की जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है। प्रार्थी के वकील हेमंत सिकरवार ने अदालत में कहा कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन दिया है, न कि कोई शिकायत याचिका प्रस्तुत की है, इसलिए प्राथमिकी का पंजीकरण अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला
अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि क्या पुलिस को किसी अपराधी की हत्या करने का अधिकार प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति अपराधी है, तो क्या कानून के अनुसार उसे पुलिस द्वारा मारना उचित है? इस पर अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है ताकि वह विस्तृत शपथ पत्र दायर कर सके। साथ ही, प्रार्थी को भी अपनी बात रखने का निर्देश दिया गया।
गैंगस्टर अमन साहू के एनकाउंटर की विशेष जांच की मांग
अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अमन साहू की मां, किरण देवी द्वारा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने एनकाउंटर से संबंधित तस्वीरें और जानकारी प्रस्तुत की थीं। किरण देवी का कहना है कि पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता ने उनके बेटे की मुठभेड़ में हत्या करने की धमकी दी थी, और यह एनकाउंटर सुनियोजित तरीके से किया गया था।
पुलिस के उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अधिवक्ता हेमंत कुमार सिकरवार ने अदालत को सूचित किया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों, डीजीपी, एसएसपी और एटीएस के खिलाफ ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज करवाने का आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने इसे रजिस्टर नहीं किया। उन्होंने 11 मार्च को पलामू में हुए कथित एनकाउंटर की सीबीआइ से जांच की मांग की। किरण देवी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके बेटे को रायपुर से रांची लाते समय योजनाबद्ध तरीके से मारा।
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!